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नीरव मोदी पर बिना अनुमति कोई नया मामला नहीं, ईडी और सीबीआई यूके अदालत को देंगी हलफ़नामा

 

प्रत्यर्पण के बाद गिरफ्तारी नहीं होगी – भारत ने दिया आश्वासन

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आयकर विभाग जैसी अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर यह निर्णय लिया है कि वे लंदन स्थित वेस्टमिंस्टर कोर्ट में एक संयुक्त हलफनामा दाखिल करेंगी। इस हलफनामे में भारत यह आश्वासन देगा कि पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले के भगोड़े आरोपी नीरव मोदी के खिलाफ भारत में कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।

यदि भविष्य में किसी नए मामले की आवश्यकता भी पड़ी तो वह केवल यूके अदालत की अनुमति से ही दर्ज किया जाएगा।

भारतीय एजेंसियों द्वारा दिए जा रहे इन आश्वासनों में यह भी शामिल है कि नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पित किए जाने के बाद किसी भी एजेंसी द्वारा किसी नए मामले में गिरफ्तार या पूछताछ नहीं की जाएगी, सिवाय उन मामलों के जिनमें पहले से मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से संबंधित आरोपपत्र भारतीय अदालतों में दाखिल किए जा चुके हैं।

कुछ वर्ष पूर्व यूके हाई कोर्ट ने नीरव मोदी की उस अपील को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने यह कहते हुए अपने प्रत्यर्पण पर रोक लगाने की मांग की थी कि उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई है और वे आत्महत्या कर सकते हैं। उस समय अदालत ने भारत सरकार द्वारा दिए गए इस आश्वासन को स्वीकार किया था कि मुंबई की आर्थर रोड जेल में नीरव मोदी को सुरक्षित और मानवीय परिस्थितियों में रखा जाएगा तथा भारत “एक मित्रवत देश” है।

भारतीय एजेंसियों का यह नवीनतम हलफनामा वेस्टमिंस्टर कोर्ट में नीरव मोदी द्वारा दायर उस अपील के जवाब में प्रस्तुत किया जाएगा जिसमें उन्होंने अपने प्रत्यर्पण मामले को पुनः खोलने और अपने निर्वासन (deportation) पर रोक लगाने की मांग की है। इस मामले की सुनवाई 23 नवंबर को निर्धारित की गई है।

पिछले कई वर्षों से भारत यूके की अदालतों में नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। नीरव मोदी को 2019 में लंदन में भारतीय प्रत्यर्पण अनुरोध पर गिरफ्तार किया गया था और वे पिछले छह वर्षों से जेल में बंद हैं। इस वर्ष मई में उनकी जमानत याचिका आठवीं बार यह कहते हुए खारिज कर दी गई कि उनके फरार होने और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है।

नीरव मोदी ने अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ सभी अपीलें हार दी हैं। यूके हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की अनुमति याचिका भी खारिज कर दी है।
नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चौकसी दोनों ही भारत में ₹13,500 करोड़ के पीएनबी घोटाले के मुकदमों का सामना कर रहे हैं। नीरव मोदी को घोषित भगोड़ा आर्थिक अपराधी (Fugitive Economic Offender) घोषित किया जा चुका है और ₹2,700 करोड़ से अधिक की संपत्तियाँ जब्त की जा चुकी हैं जो उनसे या उनके सहयोगियों से जुड़ी मानी जाती हैं।

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