ऊर्जा भंडारण में भारत की बड़ी छलांग: अब सुपरकैपेसिटर चलेंगे और भी ज़्यादा!
A HIGH-VOLTAGE SUPERCAPACITOR BASED ON A DUAL-FUNCTIONAL POROUS GRAPHENE CARBON NANOCOMPOSITE (PGCN) ELECTRODE HAS BEEN DEVELOPED WHICH COULD FACILITATE STABLER SUPERCAPACITORS FOR APPLICATIONS LIKE SOLAR PANELS AND ALSO PROVIDE ELECTRIC VEHICLES WITH INCREASED RANGE AND FASTER ACCELERATION. CONVENTIONAL ELECTROLYTES USED IN COMMERCIAL SUPERCAPACITORS CAN OPERATE BETWEEN 2.5–3.0 V AND BEGIN TO DECOMPOSE OR FACE SAFETY ISSUES (SUCH AS FLAMMABILITY) AT HIGHER VOLTAGES.

By- Jyoti Rawat
कल्पना कीजिए कि आपके इलेक्ट्रिक वाहन (EV) को न केवल लंबी रेंज मिले, बल्कि वह पलक झपकते ही रफ्तार भी पकड़ ले। भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसा ‘हाई-वोल्टेज सुपरकैपेसिटर’ विकसित किया है जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को बदलने की ताकत रखता है।
क्या है यह नया आविष्कार?
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान ARCI के शोधकर्ताओं ने एक विशेष पोरस ग्राफीन कार्बन नैनोकम्पोजिट (PGCN) इलेक्ट्रोड तैयार किया है। यह इलेक्ट्रोड पारंपरिक सीमाओं को तोड़ते हुए 3.4V की अभूतपूर्व वोल्टेज क्षमता प्रदान करता है, जबकि बाजार में मौजूद सामान्य सुपरकैपेसिटर 3.0V पर ही दम तोड़ने लगते हैं।

यह क्यों खास है? (प्रमुख विशेषताएं)
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दोहरी कार्यक्षमता: PGCN सामग्री की सतह को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह पानी को दूर रखती है (Water-repellent) लेकिन कार्बनिक इलेक्ट्रोलाइट्स के साथ बेहतरीन तालमेल बिठाती है।
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पावरफुल परफॉर्मेंस: यह तकनीक ऊर्जा घनत्व (Energy Density) को लगभग दोगुना कर देती है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों को बेहतर रेंज और तेज़ त्वरण मिलता है।
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अद्भुत स्थायित्व: यह सुपरकैपेसिटर 15,000 बार चार्ज-डिस्चार्ज होने के बाद भी अपनी 96% क्षमता बनाए रखता है।
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कॉम्पैक्ट डिजाइन: उच्च वोल्टेज क्षमता के कारण अब कम सेल्स को जोड़कर भी अधिक शक्ति प्राप्त की जा सकती है, जिससे बैटरी पैक का आकार छोटा और हल्का होगा।
पर्यावरण के अनुकूल निर्माण (Eco-Friendly Process)
इस इलेक्ट्रोड को बनाने की प्रक्रिया भी उतनी ही क्रांतिकारी है जितना कि इसका परिणाम:
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कोई जहरीले रसायन नहीं: इसे 1,2-प्रोपेनेडियोल का उपयोग करके ‘हाइड्रोथर्मल कार्बोनाइजेशन’ प्रक्रिया से बनाया जाता है।
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कम उत्सर्जन: यह प्रक्रिया 300°C पर एक सीलबंद पात्र में की जाती है, जिसमें किसी बाहरी गैस या हानिकारक रसायनों की आवश्यकता नहीं होती।
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मेक इन इंडिया: यह तकनीक ‘आत्मनिर्भर भारत’ और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
भविष्य के उपयोग
यह नवाचार केवल कारों तक सीमित नहीं है। इसकी उच्च शक्ति घनत्व (17,000 W/kg) इसे निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए गेम-चेंजर बनाती है:
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इलेक्ट्रिक वाहन (EVs): तेज रफ्तार और लंबी दूरी के लिए।
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सोलर पैनल्स: सौर ऊर्जा को अधिक स्थिरता के साथ स्टोर करने के लिए।
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ग्रिड स्टोरेज: बिजली वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए।
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पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक्स: गैजेट्स की बैटरी लाइफ सुधारने के लिए।
Chemical Engineering Journal में प्रकाशित यह अध्ययन साबित करता है कि भारत उन्नत ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में विश्व स्तर पर नेतृत्व करने के लिए तैयार है।
