वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूर्ण होने पर नागनाथ पोखरी महाविद्यालय में विविध प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन

पोखरी,11 नवंबर ( राणा ). भारत के राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नागनाथ पोखरी में प्राचार्या प्रो० डॉ० रीटा शर्मा के नेतृत्व में विभिन्न प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर पोस्टर प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता एवं क्विज़ प्रतियोगिता का सफलतापूर्वक आयोजन हुआ, जिनमें छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
परिणाम इस प्रकार रहे —
पोस्टर प्रतियोगिता में
प्रथम स्थान – कु० दिव्या राणा (बी.ए. तृतीय सेमेस्टर)
द्वितीय स्थान – कु० नेहा (एम.ए. तृतीय सेमेस्टर)
तृतीय स्थान – कु० अर्चना (एम.ए.)
निबंध प्रतियोगिता में
प्रथम स्थान – कु० रिया (बी.ए. तृतीय सेमेस्टर)
द्वितीय स्थान – कु० नेहा (बी.ए. पंचम सेमेस्टर)
तृतीय स्थान – कु० आयशा (बी.ए. प्रथम सेमेस्टर)
क्विज़ प्रतियोगिता में
प्रथम स्थान – कु० ममता (एम.ए. प्रथम सेमेस्टर)
द्वितीय स्थान (संयुक्त) – कु० नेहा (एम.ए. तृतीय सेमेस्टर), कु० पार्वती (बी.ए. तृतीय सेमेस्टर), कु० नेहा (बी.ए. पंचम सेमेस्टर), कु० लक्ष्मी (बी.ए. पंचम सेमेस्टर), कु० वर्षा (एम.ए. तृतीय सेमेस्टर), कु० श्रेया चौधरी (बी.ए. पंचम सेमेस्टर) एवं कु० मधु (बी.ए. तृतीय सेमेस्टर)।
तृतीय स्थान (संयुक्त) – कु० आरती (बी.ए. तृतीय सेमेस्टर), कु० आईशा (बी.ए. तृतीय सेमेस्टर), कु० कली (बी.ए. प्रथम सेमेस्टर), कु० काजल (बी.ए. तृतीय सेमेस्टर), कु० आसिता (एम.ए. तृतीय सेमेस्टर) एवं कु० साक्षी (एम.ए. तृतीय सेमेस्टर)।
प्रतियोगिताओं के निर्णायक मंडल में डॉ० कीर्ति गिल, डॉ० शशि चौहान, डॉ० अंशु सिंह एवं डॉ० आरती रावत शामिल रहीं। राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ० शाजिया सिद्दीकी ने विद्यार्थियों को ऐसी प्रतियोगिताओं में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
प्राचार्या प्रो० डॉ० रीटा शर्मा ने “वंदे मातरम” के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों में राष्ट्रीय चेतना का संचार किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ छात्रों में आत्मविश्वास, सृजनात्मकता और राष्ट्रप्रेम की भावना को प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने छात्राओं को आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बनने का भी संदेश दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ० जगजीत सिंह ने किया, जिन्होंने “वंदे मातरम” की भूमिका को स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
