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अल्पसंख्यक अधिकार दिवस पर मुख्यमंत्री धामी ने गिनायीं अल्पसंख्यकों को दी जाने वाली सुविधाएं 

देहरादून, 18  दिसंबर।   मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला (गढ़ी कैंट), देहरादून में विश्व अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यक समुदाय के मेधावी छात्रों को सम्मानित किया तथा विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित मुस्लिम महिलाओं ने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। महिलाओं ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री धामी प्रदेश और अल्पसंख्यक समुदाय के लिए एक भाई की तरह कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन भारत की एकता और अखंडता के संरक्षण हेतु हमारे मौलिक कर्तव्यों को याद करने का अवसर है। भारतीय संस्कृति में सदियों से समानता तथा सभी धर्मों व समुदायों के प्रति सम्मान की परंपरा रही है। अनेक संस्कृतियों, परंपराओं, भाषाओं और खान-पान की विविधता के बावजूद भारत में एकता की भावना सदैव बनी रही है। उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के महान सिद्धांत को आत्मसात करते हुए भारत ने विश्व को सदैव एक परिवार के रूप में देखा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र से सभी समुदायों को आगे बढ़ाया जा रहा है। जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना तथा मुफ्त राशन योजना जैसी अनेक योजनाओं से अल्पसंख्यक समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में करतारपुर साहिब कॉरिडोर का निर्माण, लंगर पर करों की छूट, जियो पारसी योजना, बौद्ध सर्किट का विकास, जैन अध्ययन केंद्र की स्थापना, हज यात्रा को डिजिटल व पारदर्शी बनाना तथा तीन तलाक जैसी कुप्रथा का अंत जैसे निर्णय लिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में स्कूल, कॉलेज, छात्रावास, आईटीआई, स्वास्थ्य केंद्र तथा कौशल विकास संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं। नए वक्फ कानूनों में सुधार से वक्फ संपत्तियों के पारदर्शी और उत्तरदायी उपयोग की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं, ताकि इनका लाभ समाज के गरीब, जरूरतमंद और पिछड़े वर्गों तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अल्पसंख्यक क्षेत्रों में आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास के लिए ‘अल्पसंख्यक विकास निधि’ स्थापित की गई है, जिसके तहत प्रतिवर्ष 4 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। ‘मुख्यमंत्री हुनर योजना’ से अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। ‘अल्पसंख्यक स्वरोजगार योजना’ के अंतर्गत 25 प्रतिशत सब्सिडी के साथ 10 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध है। ‘मौलाना आजाद एजुकेशन ऋण योजना’ से गरीब अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त शिक्षा ऋण दिया जा रहा है, जिससे पिछले 4 वर्षों में 169 लाभार्थियों को 4 करोड़ रुपये से अधिक वितरित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए नया अल्पसंख्यक शिक्षा कानून लागू किया गया है। यह कानून सभी अल्पसंख्यक समुदायों—सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, पारसी तथा मुस्लिम—को शिक्षा में समान अवसर और संवैधानिक अधिकार प्रदान करेगा। इसके तहत सभी मदरसों सहित अल्पसंख्यक विद्यालयों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड का निर्धारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सभी धर्मों की स्वायत्तता की रक्षा के लिए राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया है, ताकि दबाव, प्रलोभन या छल से होने वाले धर्मांतरण को रोका जा सके और सामाजिक सौहार्द बना रहे। विश्व के कई देशों में अल्पसंख्यकों को भेदभाव व उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने सभी अल्पसंख्यकों से आह्वान किया कि सोशल मीडिया के माध्यम से उन देशों में हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाएं।

इस अवसर पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती फरजाना बेगम, पद्मश्री डॉ. आर.के. जैन, श्री हेमकुंड साहिब ट्रस्ट अध्यक्ष श्री नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष श्री शादाब शम्स तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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