चमोली के नंदानगर के सेरा गांव में फिर टूटा कहर, बादल फटने से भारी तबाही
-महिपाल गुसाईं की रिपोर्ट-
गोपेश्वर, 18 सितम्बर । चमोली जिले का नंदानगर प्रखंड एक बार फिर आपदा की चपेट में आ गया। 17 सितम्बर की रात बांजबगड़, मोख और धुर्मा क्षेत्र में बादल फटने से चारों ओर तबाही का मंजर फैल गया। ग्रामीणों ने किसी तरह जिलाधिकारी संदीप तिवारी तक सूचना पहुंचाकर राहत व बचाव की अपील की है।
जानकारी के अनुसार सेरा गांव में जिन ग्रामीणों के मकान बहे उनमे महियापीएल सिंह गुसाईं विंदो सिंह गुसाईं माधो सिंह गुसाईं पुस्कर सिंह नेगी बिजमा देवी राजेंद्र सिंह हिम्मत सिंह बलवीर सिंह नेगी शामिल हैं।
सबसे अधिक नुकसान सेरा गांव में हुआ है। यह वही गांव है जहां 8 जुलाई को भी आपदा ने भारी तबाही मचाई थी। ग्रामीण किसी तरह सामान्य जीवन की ओर लौट ही रहे थे कि दूसरी बार प्रकृति का कहर टूट पड़ा। गांव में कई मकान, खेत-खलिहान और दुकानें बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, सबसे पहले महिपाल सिंह का घर आंशिक रूप से बहा और मोक्ष नदी का पानी भीतर घुस गया। इसके बाद अवतार सिंह और पुष्कर सिंह के मकान भी खतरे की जद में आ गए। लोग रात को जान बचाने के लिए घर छोड़ भागने को मजबूर हुए।
ऊपरी धुर्मा गांव में भी कई आवासीय भवन असुरक्षित हो गए हैं, जबकि बागड़ टॉप में स्थित दुकानें और मकान मलबे में दबकर बह गए। बताया जा रहा है कि बागड़ बस्ती के ऊपर बादल फटने से आए भारी मलबे ने नदी का रुख बदल दिया, जिससे सेरा गांव सबसे अधिक प्रभावित हुआ।
नंदानगर के कुंतरी, फफाली और बांजबगड़ गांवों में भी घर दबने और खेतों के बहने की खबर है। ग्रामीण बताते हैं कि बादल फटते ही लोग जान बचाने के लिए जंगलों की ओर भागे। अभी तक जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बलबीर सिंह, विनोद सिंह, प्रकाश सिंह, अवतार सिंह, सिबर सिंह और महिपाल सिंह के परिवारों को भारी नुकसान पहुंचा है।
आपदा के बाद पूरे इलाके का संपर्क कट गया है। बिजली आपूर्ति ठप है और सड़कों पर मलबा भरने से आवाजाही भी बंद हो गई है। सेरा गांव के पास बने पेट्रोल पंप में भी मलबा घुस गया है। बिजली और नेटवर्क न होने से लोग बाहर से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।
ग्रामीण भय और असहायता में हैं। आंसुओं और बेबसी के बीच वे केवल प्रशासन से त्वरित राहत और पुनर्वास की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
