पोखरी तहसील फिर एसडीएम विहीन, जनप्रतिनिधियों में रोष; मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
– राजेश्वरी राणा की रिपोर्ट –
पोखरी, 6 मार्च । क्षेत्रीय जनता के लंबे संघर्ष के बाद संयुक्त उत्तर प्रदेश के समय वर्ष 1998 में अस्तित्व में आई पोखरी तहसील एक बार फिर प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो गई है। जिलाधिकारी के आदेश पर यहां तैनात उपजिलाधिकारी का स्थानांतरण गैरसैंण कर दिए जाने से तहसील फिलहाल एसडीएम विहीन हो गई है। इससे क्षेत्र के लोगों में भारी नाराजगी व्याप्त है। वर्तमान में पोखरी तहसील का अतिरिक्त प्रभार कर्णप्रयाग के उपजिलाधिकारी को सौंपा गया है, जिससे स्थानीय लोगों के प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
गौरतलब है कि पोखरी तहसील भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी तथा बद्रीनाथ विधायक लखपत सिंह बुटोला की गृह तहसील है। इसके बावजूद यहां स्थायी रूप से एसडीएम की तैनाती न होना क्षेत्रीय जनता के लिए चिंता और नाराजगी का विषय बना हुआ है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण तहसील का लंबे समय तक उपजिलाधिकारी विहीन रहना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 1998 से पहले पोखरी क्षेत्र चमोली तहसील के अंतर्गत आता था। उस समय क्षेत्र के लोगों को मूल निवास, चरित्र प्रमाण पत्र, हैसियत प्रमाण पत्र, खाता-खतौनी की नकल सहित विभिन्न सरकारी और राजस्व संबंधी कार्यों के लिए चमोली तहसील जाना पड़ता था। दूरी अधिक होने के कारण ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था और समय व धन दोनों की बर्बादी होती थी।
इन्हीं समस्याओं को देखते हुए क्षेत्रीय जनता ने वर्षों तक संघर्ष और आंदोलन किया। लंबे आंदोलन और जनदबाव के बाद वर्ष 1998 में पोखरी को तहसील का दर्जा मिला। इसके बाद यहां तहसील का मुख्य भवन बनाया गया तथा एसडीएम और तहसीलदार के आवास सहित कर्मचारियों के लिए आवासीय भवनों का निर्माण भी कराया गया। तहसील बनने के बाद क्षेत्र के अधिकांश प्रशासनिक कार्य स्थानीय स्तर पर ही होने लगे, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिली।
हालांकि शुरुआती वर्षों में यहां नियमित रूप से एसडीएम और तहसीलदार की तैनाती होती रही, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से अधिकारियों की तैनाती की स्थिति अस्थिर बनी हुई है। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि कई अधिकारी अपनी पहुंच और सिफारिश के आधार पर यहां से शीघ्र स्थानांतरण करवा लेते हैं, जिससे तहसील की प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती रहती है।
वर्तमान में नायब तहसीलदार को तहसीलदार का प्रभार दिया गया है, जबकि कुछ ही दिन पहले यहां तैनात उपजिलाधिकारी अबरार अहमद का जिलाधिकारी द्वारा गैरसैंण स्थानांतरण कर दिया गया। इसके बाद पोखरी तहसील का अतिरिक्त प्रभार कर्णप्रयाग के उपजिलाधिकारी को सौंप दिया गया है। जिलाधिकारी के इस आदेश को लेकर क्षेत्रीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है और लोग इसे तहसील के साथ प्रशासनिक उपेक्षा के रूप में देख रहे हैं।
इस संबंध में नगर पंचायत अध्यक्ष सोहन लाल, क्षेत्र पंचायत प्रमुख राजी देवी, थालाबैड़ वार्ड से जिला पंचायत सदस्य एवं व्यापार मंडल अध्यक्ष बीरेंद्र सिंह राणा, ज्येष्ठ प्रमुख ऊषा कंडारी, कांग्रेस के ब्लॉक संरक्षक एवं व्यापार मंडल के जिला महामंत्री कुंवर सिंह चौधरी, टैक्सी यूनियन अध्यक्ष विजयपाल सिंह रावत, रमेश चौधरी, संतोष चौधरी, राज्य आंदोलनकारी संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष कुंवर सिंह खत्री, राज्य महिला आयोग की सदस्य वत्सला सती, पूर्व प्रमुख नरेंद्र सिंह रावत, नगर पंचायत पार्षद गिरीश किमोठी, विष्णु प्रसाद चमोला सहित अनेक जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और व्यापारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर पोखरी तहसील में स्थायी रूप से उपजिलाधिकारी की तैनाती की मांग की है।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यदि शीघ्र ही पोखरी तहसील में स्थायी एसडीएम की तैनाती नहीं की गई तो क्षेत्रीय जनता को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रशासनिक उपेक्षा को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
