टीएमयू को यूपीएओ ने दिया उड़ान को नया आसमां

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ख़ास बातें

  • लोंग केस परीक्षण में बरेली के डॉ. निशांत आए अव्वल
  • शॉर्ट केस एक्जामिन में देहरादून के डॉ. अर्पित प्रथम
  • बोन ऑपरेशन के बाद इंफेक्शन से रहें बेहद सतर्क
  • बोन टीबी में पचास फीसदी को पॉट स्पाइन की शिकायत
  • साइंटिफिक प्रोग्राम के अंत में वितरित किए गए सर्टिफिकेट
  • यूपी, दिल्ली, उत्तराखंड और हरियाणा से आए डेलीगेट्स
  • आखिरी दिन दस नामचीन ऑर्थोपेडिसियन्स ने दिए व्याख्यान

   —प्रो. श्याम सुंदर भाटिया

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में ऑर्थो विभाग की ओर से ऑडी में आयोजित यूपीओए- पीजीआईसीएल यानी साइंटिफिक प्रोग्राम मे यूपी, दिल्ली, उत्तराखंड और हरियाणा से आए ऑर्थो के विद्वानों ने बोन कैंसर, बोन टीबी, नी इंजरी, कोहनी का टेढ़ापन, नर्व इंजरी, बच्चों की पैदाइशी अपंगता, कूल्हे का फ्रेक्चर, हड्डियों के ऑपरेशन, हड्डी में होने वाले इंफेक्शन जैसे सब्जेक्ट्स पर न केवल अपने अनुभव साझा किए बल्कि पीजी के 55 स्टुडेंट्स के लोंग केसों और शॉर्ट केसों का एक्जामिन भी किया। अंततः केस प्रेजेंटेशन के लोंग केस एक्जामिन में रूहेलखंड मेंडिकल कॉलेज, बरेली के डॉ. निशांत तो एसजीआरआरआईएम एंड एचएस मेडिकल कॉलेज, देहरादून के डॉ. अर्पित शॉर्ट केस एक्जामिन में अव्वल रहे। इन दोनों ऑर्थो के रेजिडेंट को प्रमाण पत्र और अवार्ड देकर पुरस्कृत किया गया। इस साइंटिफिक प्रोग्राम में सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट वितरित किए गए। आखिरी दिन दस नामचीन ऑर्थोपेडिसियन्स ने व्याख्यान दिए। हड्डी विशेषज्ञों ने सचेत किया, हड्डी के ऑपरेशन के बाद रोगी को बेहद चौकन्ना रहने के जरूरत है क्योंकि रोगी की जरा-सी कोताही भी इंफेक्शन को आमंत्रित करने जैसा है। यदि इंफेक्शन हो भी जाए तो इलाज संभव है। एक आंकडा बताता है, बोन टीबी में पचास फीसदी रोगियों में पॉट स्पाइन की शिकायत मिलती है। यदि इसके रोगी ने भी लापरवाही बरती तो लकवा होने का अंदेशा रहता है। यूपीओए- पीजीआईसीएल के ऑर्गेनाइजिंग चेयरपर्सन एवम् मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अजय पंत और ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी एवम् ऑर्थोपेडिक्स के एचओडी डॉ. अमित सर्राफ ने साइंटिफिक प्रोग्राम को तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी की बड़ी उपलब्धि बताया। कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, ग्रुप वाइस चेयरमैन श्री मनीष जैन और एमजीबी श्री अक्षत जैन ने शुक्रिया अदा करते हुए कहा, यूपीओए ने पीजीआईसीएल की मेजबानी का स्वर्णिम अवसर देकर टीएमयू मेडिकल कॉलेज को उड़ान के लिए नए पंख दिए हैं।

 

दूसरे दिन हड्डी के इंफेक्शन पर हेड ऑफ डिपार्टमेंट ऑर्थोपेडिक्स एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा के डॉ. सी. पी. पाल, इंफेक्टिड नॉन यूनियन पर प्रोफेसर हेड ऑफ डिपार्टमेंट ऑर्थोपेडिक्स श्री राममूर्ति स्मारक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल कॉलेज, बरेली डॉ. संजय गुप्ता, रिसेंट एडवांसेज इन प्रोइस्थेटिक ज्वाइंट इंफेक्शन पर प्रोफेसर हेड ऑफ डिपार्टमेंट ऑर्थोपेडिक्स एसएचकेएम गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज नूह, हरियाणा के डॉ. सिद्धार्थ गोयल, एक्स-रे, सीटी स्कैन पर प्रोफेसर डिपार्टमेंट ऑफ रेडियोलॉजी टीएमयू के डॉ. अंकुर मल्होत्रा, एमआरआई एंड पेटस्कैन पर प्रोफेसर डिपार्टमेंट ऑफ रेडियोलॉजी डॉ. राजुल रस्तौगी, घुटने का परीक्षण पर प्रोफेसर एंड चेयरमेन ऑफ डिपार्टमेंट ऑर्थोपेडिक्स जेएन मेडिकल कॉलेज एएमयू अलीगढ के डॉ. अमीर बिन साबिर, बायोमेकेनिक्स ऑफ नी ज्वाइंट पर प्रोफेसर एंड हेड ऑफ डिपार्टमेंट ऑर्थोपेडिक्स हमदर्द इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइसेज एंड रिसर्च हमदर्द नगर, दिल्ली के डॉ. संदीप कुमार, अपोर्च टू एंग्यूलर डिफॉर्मेटिज नी ज्वाइंट पर प्रोफेसर एंड हेड ऑफ डिपार्टमेंट ऑर्थोपेडिक्स गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज, फिरोजाबाद के डॉ. विपुल अग्रवाल, ऑर्थोसिस एंड पोस्थॉसिस पर प्रोफेसर हेड ऑफ डिपार्टमेंट ऑर्थोपेडिक्स एसएचकेएम गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज, नूह हरियाणा के डॉ. सिद्धार्थ गोयल, एडवांसेज इंन ट्रामा इंस्ट्रुमेंट्स इंप्लांट पर एसोसिएट प्रोफेसर डिपार्टमेंट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स आरएमएल लखनऊ के डॉ. विनीत कुमार ने अपने-अपने व्याख्यान दिए। टीएमयू के ऑर्थो विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रखर अग्रवाल ने बताया, अंततः केस प्रेजेंटेशन के लोंग केस एक्जामिन में रूहेलखंड मेंडिकल कॉलेज, बरेली के डॉ. निशांत तो एसजीआरआरआईएम एंड एचएस मेडिकल कॉलेज, देहरादून के डॉ. अर्पित शॉर्ट केस एक्जामिन में अव्वल रहे। टीएमयू ऑर्थोपेडिक्स के पीजी छात्र डॉ. रजत खन्ना ने बताया, टीएमयू समेत यूपी, दिल्ली, उत्तराखंड के 55 पीजी स्टुडेंट्स और नामचीन ऑर्थोपेडिसियन्स के बीच संवाद भी हुआ। दोनों दिन जाने-माने ऑर्थोपेडिसियन्स ने लोंग केसों और शॉर्ट केसों के एक्जामिन  के बाद अपनी बहुमूल्य राय व्यक्त करी।

 

 

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