सड़कों पर लाखों लोगों की जानें ले रही है तेज रफ़्तार
1.24 लाख सड़क हादसों में मौतें, 70% की वजह तेज रफ्तार; गडकरी ने राज्यसभा में पेश किए आंकड़े
नई दिल्ली। देश में सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण अब भी तेज रफ्तार ही है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को राज्यसभा को बताया कि वर्ष 2024 में कुल 1.24 लाख सड़क दुर्घटना मृतकों में से करीब 70 प्रतिशत मौतें तेज रफ्तार के कारण हुईं।
मंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत पिछले पाँच वर्षों के आंकड़ों में खुलासा हुआ कि स्पीडिंग लगातार घातक दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बनी हुई है। डेटा के अनुसार तेज रफ्तार से होने वाली मौतों की हिस्सेदारी 2020 में 65%, 2021 में 69% और 2022 में 71% से अधिक रही। 2023 में यह गिरकर 68% हुई, लेकिन 2024 में दोबारा बढ़ोतरी दर्ज की गई।
तमिलनाडु में सबसे अधिक मौतें
राज्यों में तमिलनाडु सबसे ऊपर रहा, जहाँ वर्ष 2024 में 24,118 में से 12,010 मौतें तेज रफ्तार की वजह से हुईं। कर्नाटक में करीब 92% (11,380) और मध्य प्रदेश में लगभग 81% (11,970) सड़क हादसा मौतें स्पीडिंग से जुड़ी थीं।
हेलमेट और सीटबेल्ट न पहनना भी बड़ी वजह
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हेलमेट और सीटबेल्ट न पहनने के कारण होने वाली मौतें भी गंभीर चिंता का विषय हैं। 2024 में ऐसी मौतों की संख्या 69,088 रही, जो 2023 के मुकाबले थोड़ी कम है।
तमिलनाडु (7,744), मध्य प्रदेश (6,541) और महाराष्ट्र (5,946) में हेलमेट न पहनने से सबसे अधिक मौतें दर्ज की गईं।
सीटबेल्ट न लगाने पर यूपी सबसे आगे
सीटबेल्ट न पहनने से होने वाली मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर रहा, जहाँ 2,816 मौतें दर्ज की गईं। इसके बाद मध्य प्रदेश (1,929) और महाराष्ट्र (1,427) का स्थान रहा।
कुछ राज्यों—उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान—में ऐसी मौतों में कमी आई है, जबकि कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना में बढ़ोतरी देखी गई।
डब्ल्यूएचओ ने भी चेताया: रफ्तार बढ़ते ही बढ़ता है खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार औसत गति में 1% बढ़ोतरी से घातक दुर्घटना का खतरा 4% और गंभीर चोट का जोखिम 3% बढ़ जाता है।
पैदलयात्रियों के लिए खतरा और भी अधिक है—50 किमी/घंटा से 65 किमी/घंटा की रफ्तार पर कार की टक्कर से मृत्यु की संभावना 4.5 गुना बढ़ जाती है।
डब्ल्यूएचओ ने बताया कि सही तरीके से हेलमेट पहनने से मौत का खतरा छह गुना तक और सिर की गंभीर चोट का जोखिम 74% तक घट जाता है, जबकि सीटबेल्ट लगाने से वाहन सवारों की मौत का खतरा 50% कम हो जाता है।
