उत्तराखण्ड के पहाड़ों में पांडव नृत्य की धूम, संस्कृति संरक्षण का बना माध्यम
गौचर, 5 जनवरी (गुसाईं)। इन दिनों उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों में पांडव नृत्य की धूम मची हुई है। गौचर नगर पालिका क्षेत्र के पनाई तथा विकास खण्ड पोखरी के गंगा घाटी स्थित बमोथ, करछुना सहित कई गांवों में महाभारत की कथा को जीवंत बनाए रखने, धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करने और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से पांडव नृत्य का आयोजन किया जा रहा है।
ढोल-दमाऊं की थाप और पंडितों के मंत्रोच्चार के बीच कलाकार पांडव, पाश्व और द्रौपदी के रूप में अवतरित होकर महाभारत के पात्रों की वीरता, संघर्ष और धर्म-अधर्म के संदेशों को जागर लगाकर नृत्य-नाट्य के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। दर्शकों का कहना है कि यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सामाजिक अनुष्ठान का स्वरूप लिए हुए हैं, जो हमारी पौराणिक सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखते हैं।
गौचर व्यापार संघ अध्यक्ष राकेश लिंगवाल के अनुसार पनाई गांव में आयोजित पांडव लीला के सफल संचालन में उमराव सिंह नेगी, रघुनाथ सिंह बिष्ट, पंडित अनसूया जोशी, गिरीश जोशी, चन्द्र सिंह चौहान, अनसूया नेगी, नरेंद्र नेगी, रंजीत सिंह, बीरेंद्र बिष्ट, दयाल चौहान, रणजीत कनवासी, विपिन नेगी, विपुल नेगी, कुलदीप चौधरी और अवनीश चौधरी का विशेष योगदान रहा।
वहीं करछुना में आयोजन समिति के अध्यक्ष खुशाल सिंह के नेतृत्व में आयोजित पांडव लीला ने गांव से पलायन कर चुके लोगों को भी घर लौटने का अवसर दिया है। बमोथ के पंडित प्रदीप लखेड़ा का कहना है कि महाभारत की कथा को जीवंत बनाए रखने और धार्मिक आस्था व सांस्कृतिक विरासत को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजन अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।
