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पोखरी तहसील में न एसडीएम है और न तहसीलदार, जनता आखिर जाये किसके पास

 

किमोठा के प्रधान ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

पोखरी, 4 अक्टूबर (राणा)। तहसील पोखरी में लंबे समय से स्थायी उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और तहसीलदार की नियुक्ति न होने से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर किमोठा गांव के प्रधान बाल ब्रह्मचारी हरिकृष्ण किमोठी ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र नियुक्ति की मांग की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान में पोखरी तहसील पूरी तरह प्रभारी अधिकारियों के भरोसे चल रही है। एसडीएम के थराली स्थानांतरित हो जाने के बाद यहां का प्रभार चमोली की उपजिलाधिकारी के पास है, जबकि तहसीलदार के मेडिकल अवकाश पर होने के कारण उनका कार्यभार कर्णप्रयाग के तहसीलदार संभाल रहे हैं। इस कारण आम जनता को राजस्व एवं प्रमाण-पत्र संबंधी कार्यों के लिए बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

किमोठी ने बताया कि वर्ष 1998 में संयुक्त उत्तर प्रदेश के समय लंबे संघर्ष के बाद अस्तित्व में आई पोखरी तहसील आज फिर से प्रभारी अधिकारियों के सहारे चल रही है। इससे प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ कानून-व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

जनता को निवास प्रमाण पत्र, हैसियत प्रमाण पत्र, ईडब्ल्यूएस, चरित्र प्रमाण पत्र, खाता-खतौनी और दाखिल-खारिज जैसे आवश्यक दस्तावेजों के लिए परेशान होना पड़ रहा है। हाल की आपदा में क्षति का आंकलन समय पर न हो पाने के कारण मुआवजा वितरण में भी देरी हो रही है।

किमोठी ने कहा कि यह क्षेत्र प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेन्द्र भट्ट, पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र सिंह भंडारी और बद्रीनाथ विधायक लखपत सिंह बुटोला की गृह तहसील है, फिर भी यहां की प्रशासनिक उपेक्षा जनता के साथ अन्याय है। उन्होंने जिलाधिकारी से आग्रह किया कि जब तक स्थायी नियुक्ति संभव न हो, तब तक एसडीएम और तहसीलदार की अस्थायी नियुक्ति तत्काल की जाए, ताकि जनता को राहत मिल सके।

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