धर्म/संस्कृति/ चारधाम यात्रा

राज जात टालने से कुमाऊँ में भी असमंजस की स्थिति

– हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट 
थराली, 22 जनवरी। हिमालय की आराध्य देवी श्री नंदादेवी की पवित्र राजजात यात्रा को अपने निर्धारित समय पर ही आयोजित किया जाना चाहिए। बिना किसी ठोस कारण के इस ऐतिहासिक यात्रा को एक वर्ष आगे बढ़ाना किसी भी सूरत में उचित नहीं है। कुमाऊं क्षेत्र के देवी भक्त भी चाहते हैं कि यह यात्रा अपने तय चक्र के अनुसार वर्ष 2026 में ही संपन्न हो।
राजजात समिति नौटी द्वारा वर्ष 2026 में प्रस्तावित हिमालयी सचल महाकुंभ के रूप में विख्यात श्री नंदादेवी राजजात यात्रा को अचानक स्थगित किए जाने के बाद नौटी, कांसवा तथा नंदा सिद्धपीठ कुरूड़, बधाण, दशोली और बंड क्षेत्र के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस विषय पर वर्ष 2014 की श्री नंदादेवी राजजात यात्रा के दौरान कोट भ्रामरी एवं कुमाऊं क्षेत्र के अन्य स्थानों से निकली देव यात्राओं के साथ पूरे यात्रा मार्ग में कुमाऊं से होमकुंड तक नंगे पांव यात्रा करने वाले कपकोट के पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण से संवाददाता ने प्रतिक्रिया ली।
पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने स्पष्ट रूप से कहा कि श्री नंदादेवी राजजात यात्रा को निश्चित रूप से अपने निर्धारित समय अर्थात वर्ष 2026 में ही आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पिछले एक वर्ष से अधिक समय से यात्रा को भव्य रूप से आयोजित करने के दावे किए जा रहे थे और तैयारियों की बात भी कही जा रही थी। ऐसे में शासन-प्रशासन द्वारा तैयारियां की गई होंगी, फिर यात्रा को एक वर्ष के लिए स्थगित करने का कोई औचित्य नहीं बनता।
नौटी एवं कुरूड़ के बीच बने विरोधाभासी रवैये के कुमाऊं क्षेत्र पर पड़ रहे प्रभाव के संबंध में उन्होंने कहा कि इस विवाद के कारण कुमाऊं में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कुमाऊं के अधिकांश देवी भक्त चाहते हैं कि यह यात्रा अपने 12 वर्षीय परंपरागत चक्र के अनुसार वर्ष 2026 में ही आयोजित हो। उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में देवी भक्त इस यात्रा में सहभागिता के लिए अपनी तैयारियां पहले ही शुरू कर चुके हैं।
ललित फर्स्वाण ने कहा कि वे स्वयं प्रयास करेंगे कि कांसवा के राजकुंवर एवं कुरूड़ के नंदा भक्त एक मंच पर आएं और उत्तराखंड की आराध्य देवी श्री नंदादेवी की महान राजजात यात्रा को निर्विवाद, निर्विघ्न एवं भव्य रूप से संपन्न कराया जा सके। उन्होंने विश्वास जताया कि शीघ्र ही वे एवं कुमाऊं के अन्य देवी भक्त दोनों पक्षों से संवाद कर सर्वमान्य समाधान निकालने का प्रयास करेंगे, ताकि देश-विदेश में भी इस ऐतिहासिक यात्रा की गरिमा और भव्यता बनी रहे।

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