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पतंजलि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राष्टपति ने प्रदान की 1424 विद्यार्थियों को उपाधियां

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा – तपस्या, सरलता और कर्तव्यनिष्ठा को जीवन का आधार बनाएं विद्यार्थी

 

हरिद्वार, 2 नवंबर। पतंजलि विश्वविद्यालय में आज आयोजित द्वितीय दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने स्नातक, परास्नातक और शोधार्थी विद्यार्थियों को उपाधियाँ और स्वर्ण पदक प्रदान किए। पदक प्राप्त करने वालों में साध्वी देवपूजा, देवेंद्र सिंह (स्वामी इन्द्रदेव), मानसी (साध्वी देववाणी), अजय कुमार (स्वामी आर्षदेव), रीता कुमारी (साध्वी देवसुधा), शालू भदौरिया (साध्वी देवशीला), अंशिका, प्रीति पाठक, पूर्वा और मैत्रेई शामिल रहीं।

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि यह गर्व का विषय है कि इस दीक्षांत समारोह में 64 प्रतिशत स्वर्ण पदक छात्राओं को मिले हैं। उन्होंने कहा कि बेटियाँ आज देश का गौरव बढ़ा रही हैं और विकसित भारत के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएँ पीछे रह जाएँगी तो विकसित भारत का सपना अधूरा रह जाएगा। हरिद्वार की यह पवित्र भूमि केवल ज्ञान का नहीं, बल्कि दर्शन और साधना का केंद्र भी है।

राष्ट्रपति ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय ने योग, आयुर्वेद और अध्यात्म के क्षेत्र में महर्षि पतंजलि की परंपरा को आगे बढ़ाने का सराहनीय कार्य किया है। यहाँ शिक्षा के साथ संस्कार, विज्ञान के साथ अध्यात्म और ज्ञान के साथ व्यवहार का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे तपस्या, सरलता और कर्तव्यनिष्ठा को अपने जीवन का मार्गदर्शक बनाएं और समाज व राष्ट्र के उत्थान में योगदान दें।

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय ने योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि योग और आयुर्वेद ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई दिशा दी है और यह देखकर संतोष होता है कि युवा पीढ़ी प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को अपनाने के लिए उत्सुक है। राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थी तभी सफल माने जाएंगे जब उनका ज्ञान समाज के कल्याण में काम आएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय का यह आयोजन पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार नई शिक्षा नीति को लागू कर उत्तराखंड को शोध, नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि “सर्वश्रेष्ठ उत्तराखंड” के निर्माण में पतंजलि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी भी अहम भूमिका निभाएंगे।

स्वामी रामदेव ने कहा कि राष्ट्रपति के आगमन से पूरा पतंजलि परिवार गौरवान्वित है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी केवल शिक्षा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की भावना से प्रेरित होकर आगे बढ़ रहे हैं। स्वामी रामदेव ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय का हर विद्यार्थी ‘जॉब सीकर’ नहीं बल्कि ‘जॉब क्रिएटर’ है। यहाँ शिक्षा का आधार जाति या धर्म नहीं, बल्कि सनातन सिद्धांतों पर आधारित है।

कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को सफलतापूर्वक लागू किया है, जो शिक्षा को रोजगारपरक और मूल्य-आधारित बनाती है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने नैक से 3.48 ग्रेड पॉइंट के साथ A+ ग्रेड प्राप्त किया है। विश्वविद्यालय में शुल्कमुक्त शिक्षा प्रणाली और मेधावी विद्यार्थियों के लिए विशेष सुविधाएँ दी जाती हैं। पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन ने योग, आयुर्वेद और समग्र स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त उपलब्धियाँ हासिल की हैं।

समारोह में राज्यपाल द्वारा “फ्लोरा ऑफ राष्ट्रपति भवन” और “मेडिसिनल प्लांट्स ऑफ राष्ट्रपति भवन” पुस्तकों का विमोचन किया गया, जिनकी प्रथम प्रति राष्ट्रपति को भेंट की गई। कुल 1424 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं, जिनमें 54 स्वर्ण पदक विजेता, 62 शोधार्थी (पीएच.डी.), 3 डीलिट, 744 स्नातक और 615 परास्नातक विद्यार्थी शामिल थे।

कार्यक्रम में पतंजलि विश्वविद्यालय और पतंजलि योगपीठ परिवार के सभी वरिष्ठ सदस्य, अधिकारी, प्राध्यापक, विद्यार्थी और संन्यासी उपस्थित रहे।

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