औषधीय पौधों की खेती व अनुसंधान को बढ़ावा: हैप्रेक और हिमालया वेलनेस के बीच एमओयू

श्रीनगर (गढ़वाल), 11 नवम्बर । हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र (हैप्रेक) और हिमालया वेलनेस कंपनी, बेंगलुरु के बीच औषधीय एवं सुगंधित पौधों की व्यावसायिक खेती और अनुसंधान सहयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक एमओयू (समझौता ज्ञापन) हस्ताक्षरित हुआ है।
समझौते के तहत हैप्रेक अपनी नर्सरी में दारूहल्दी जैसे औषधीय पौधों के विकास का कार्य करेगा। हैप्रेक संस्थान के निदेशक डॉ. विजयकांत पुरोहित ने बताया कि यह समझौता न केवल पर्यावरण संरक्षण और औषधीय वनस्पतियों के संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह स्थानीय समुदायों के आजीविका सृजन में भी अहम भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि औषधीय पौधों की संगठित खेती से जंगली प्रजातियों पर दबाव कम होगा, साथ ही पहाड़ी किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके अलावा किसानों को वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों से जोड़ने का अवसर भी प्राप्त होगा।
डॉ. पुरोहित ने आगे बताया कि यह साझेदारी हैप्रेक संस्थान के स्नातकोत्तर छात्रों के लिए भी नई संभावनाएँ लेकर आई है। इस एमओयू के अंतर्गत हिमालया वेलनेस कंपनी छात्रों को औद्योगिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और शोध परियोजनाओं के अवसर उपलब्ध कराएगी, जिससे उन्हें व्यावहारिक अनुभव और कौशल विकास का लाभ मिलेगा।
हैप्रेक के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुदीप सेमवाल ने कहा कि हिमालया जैसी अग्रणी औद्योगिक कंपनी के साथ यह सहयोग पहाड़ी क्षेत्रों में औषधीय पौधों के संरक्षण, अनुसंधान और व्यावसायिक उपयोग को नई दिशा देगा।
हिमालया वेलनेस कंपनी के हेड-बॉटेनिकल एक्सट्रैक्शन यूनिट डॉ. अतुल एन. जाधव ने इस पहल को एक विन-विन मॉडल बताते हुए कहा कि इससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के साथ-साथ युवाओं में हरित उद्यमिता (Green Entrepreneurship) को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि यह तीन-वर्षीय परियोजना उत्तराखंड राज्य में पर्यावरणीय स्थिरता, जैव विविधता संरक्षण और हरित अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगी।
