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पिंडर घाटी ने जनता शराब बंदी, व्यवसायियों के हौसले होने लगे पस्त

थराली से हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
पिंडर घाटी के गांवों में एक के बाद शराबबंदी की घोषणा के बाद जहां एक ओर नशामुक्ति समाज की स्थापना को बल मिला हैं, वही दूसरी ओर शराबबंदी की घोषणाओं के चलते शराब व्यवसाई के हौंसले पस्त पड़ने लगें हैं।
दरसअल पिछले लंबे समय से पिंडर घाटी के नारायणबगड़, थराली एवं देवाल विकास खंडों में शराब का प्रचलन काफी तेजी के साथ बढ़ गया हैं। यहां पर शादी,बारात हो या नामकरण संस्कार अथवा पूजा हो या छल पूजा पहले पहल शराब की व्यवस्था प्रमुख व्यवस्थाओं में से एक व्यवस्था बनी हुई हैं।

शराब का प्रचलन तेजी के साथ बढ़ने के कारण यहां का सामाजिक, सांस्कृतिक का ताना-बाना उलझ कर रह गया हैं। क्षेत्र में लंबे समय से बढ़ते शराब के प्रचलन को रोकने के लिए तमाम प्रयास भी किए जाते रहें हैं किंतु अब तक अपेक्षित सफलता नही मिल पाईं हैं और युवा वर्ग तेजी के साथ शराब,चरच सहित अन्य नशीले पदार्थों के सेवन की ओर बढ़ रहा हैं।जिस कारण जागरूक वर्ग में चिंता बढ़ती जा रही हैं।

पिंडर घाटी में शराब के बढ़े प्रचलन पर शराब व्यवसाई जमकर चांदी काट रहें हैं। शराब व्यवसाईयों के हौंसले किस कदर बुलंद बनें हुए हैं कि गांवों, गांवों में उन्होंने स्थानीय दुकानदारों को अपना एजेड़ बना कर उन्हें शराब की जमकर सप्लाई करतें आ रहें हैं।

बताया जा रहा हैं कि जन क्षेत्रों के आसपास अधिक गांवों स्थित हैं वहां पर बकाया शराब व्यवसाईयों ने अपने गुप्त स्टोर खोल लिए हैं, और वहां से अन्य गांवों को शराब की अवैध सप्लाई की जा रही हैं, इस संबंध में जब-तब ग्रामीण जनता पुलिस, प्रशासन से भी शिकायतें करते आ रही हैं। बावजूद इसके शराब व्यवसाई शराब की तस्करी के लुकाछिपी का खेल खेलने से किसी कीमत पर नही चूक रहें हैं।
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प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों 2025 के संपन्न होने के बाद देवाल, थराली एवं नारायणबगड़ विकास खंडों में एक के बाद एक गांव में शराबबंदी के ऐलान हो रहें हैं। इसके तहत शादी, विवाह, नामकरण संस्कार, जन्मदिन, पूजाओं के अलावा सार्वजनिक स्थलों पर शराब परोसने एवं शराब पीने, स्थानीय दुकानों से शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के फैसले जारी जारी किए जा रहे हैं। फैसलों का उल्लघंन करने पर सार्वजनिक दंड लगाने, सामाजिक बहिष्कार सहित अन्य दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनियां जारी की जा रही हैं। पिछले एक से दो महिनों के अंदर शराबबंदी की घोषणा कर चुके गांवों में परिणाम भी दिखने लगें हैं, जहां पर सार्वजनिक कार्यक्रमों के साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर शराबियों की संख्या एक दम से घटी है। जो कि एक बेहतर एवं नशामुक्ति गांवों की स्थापना की ओर ठोस इशारा कर रही हैं।
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गांव में ग्राम पंचायतों एवं महिला मंगल दलों के सार्वजनिक कार्यक्रमों, सार्वजनिक स्थानों पर शराब के सेवन एवं स्थानीय दुकानों से शराब की बिक्री पर प्रतिबंधों घोषणा का काफी बढ़ प्रभाव शराबबंदी वाले गांव में तों देखने को मिल ही रहा हैं। गांव में शराबबंदी की घोषणाओं का सीधा प्रभाव शराब की बिक्री पर पड़ने लगा है। क्षेत्र के अंग्रेजी शराब के व्यवसायियों के अनुसार तमाम गांवों में शराब के सार्वजनिक सेवन पर रोक का काफी अधिक प्रभाव शराब की बिक्री पर पड़ा हैं, दुकानों से शराब की बिक्री घटी हैं। बताया जा रहा है कि जहां पहले एक शराबी बाजार आने पर घरों को लौटते समय शराब की दुकानों से एक से दो बोतलें शराब की अपने साथ ले जाता था, वही शराबबंदी वाले गांव के ग्रामीण बाजारों में ही शराब से अपना मनोरंजन कर बिना शराब लिए घरों को लौट रहे हैं। जिसका सीधा प्रभाव शराब बिक्री पर पड़ रहा हैं।शराब की दुकानों से बिक्री घटने से साफ जाहिर हैं कि शराबबंदी के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं जोकि नशामुक्ति के लिए एक शुभ संकेत ही माना जा सकता हैं
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तमाम गांवों में सार्वजनिक रूप से शराबबंदी के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अन्य क्षेत्रों के काफी अधिक गांवों में शराबबंदी के झंडे बुलंद होने की सम्भावना बलवती होने लगी हैं, ऐसा होता है तो निश्चित ही शराबियों के ऐसगाह मानें जाने वाली पिंडर घाटी नशामुक्ति की कांति के धोतक बनने से नहीं चुकेगा।

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