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गागर में सागर : सुन्दर की सुन्दरता कहि न जाय का कहिए

By- Govind Prasad Bahuguna

सुन्दर की सुन्दरता इसी में थी कि वह धरती के लाल बने रहे । विज्ञान और प्रकृति के वैज्ञानिक सामंजस्य को समझने में जीवन खपाया। पेड़ से ऐसे चिपके कि स्वयं वटवृक्ष बन गये । अश्वत्थ सर्ववृक्षाणां‌ -कृष्ण ने भी वृक्ष को अपनी *विभूति* माना था तो सुन्दर लाल जी ने भी उन्ही का अनुसरण किया। -GPB

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