हाईकोर्ट के आदेश के बाद एमडी पात्रता नियमों में बदलाव पर उठे सवाल
देहरादून, 26 फरबरी। ऊर्जा निगमों में प्रबंध निदेशक (एमडी) पद की पात्रता से जुड़े नियमों में राज्य सरकार द्वारा किए गए हालिया संशोधन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सामाजिक संगठन ‘जन प्रहार’ ने इस बदलाव पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसे प्रशासनिक पारदर्शिता और सुशासन के सिद्धांतों के विपरीत बताया है।
यह मामला उस समय चर्चा में आया जब उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पिटकुल (पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड) के एमडी श्री प्रकाश चंद्र ध्यानी को तकनीकी योग्यता के अभाव के आधार पर पद से हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद सरकार ने कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर एमडी पद के लिए तकनीकी अर्हता की अनिवार्यता को समाप्त कर गैर-तकनीकी अधिकारियों को भी पात्र बनाने का निर्णय लिया।
‘जन प्रहार’ का कहना है कि यदि यह संशोधन किसी विशेष व्यक्ति को पद पर बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया है, तो यह न केवल न्यायालय की भावना के विपरीत है, बल्कि संस्थागत मर्यादा पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि यदि यह निर्णय व्यापक प्रशासनिक सुधार या जनहित में लिया गया है, तो इसकी स्पष्ट और सार्वजनिक व्याख्या की जानी चाहिए।
इस प्रकरण में उच्च न्यायालय में पक्षकार रहीं श्रीमती दीप्ति पोखरियाल ने बताया कि 18 फरवरी 2026 के निर्णय का अनुपालन न होने पर उन्होंने अवमानना याचिका दायर की है, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है। इस मामले में मुख्य सचिव, ऊर्जा सचिव और पिटकुल के एमडी को पक्षकार बनाया गया है।
‘जन प्रहार’ की संयोजक श्रीमती सुजाता पॉल ने कहा कि हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर संबंधित अधिकारी को बचाने का प्रयास चौंकाने वाला है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि प्रस्ताव को अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। सह-संयोजक पंकज सिंह क्षेत्री ने भी आरोप लगाया कि एक अधिकारी को बचाने के लिए नियमों में बदलाव किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
संगठन ने मांग की है कि एमडी पद के लिए तकनीकी अर्हता समाप्त करने का निर्णय तुरंत वापस लिया जाए, नियम परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया और फाइल नोटिंग सार्वजनिक की जाए तथा भविष्य में संवेदनशील पदों पर नियुक्ति पूरी तरह मेरिट और पारदर्शिता के आधार पर सुनिश्चित की जाए।
‘जन प्रहार’ का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण विभाग में शीर्ष पदों पर नियुक्ति केवल योग्यता और अनुभव के आधार पर होनी चाहिए। यदि नियमों में बदलाव किसी विशेष लाभ के उद्देश्य से किया गया है, तो इसकी उच्चस्तरीय जांच अनिवार्य है।
