सुरक्षा

रक्षा मंत्री ने स्वीकृत किया रक्षा क्रय प्रलेख 2025 ; रक्षा क्षेत्र को मिलेगी नई गति

The revised document has been aligned with the updated provisions of the Manual for Procurement of Goods issued by the Ministry of Finance. As a major thrust to Aatmanirbhar Bharat, a new chapter has been included to promote self-reliance through innovation and indigenisation. This will help in the indigenisation of defence items/spares through in-house designing and development in collaboration with public/private industries, academia, IITs, IISc & other private institutions of repute by utilising the talent of young bright minds.

नयी दिल्ली, 14 सितम्बर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को रक्षा मंत्रालय की खरीद प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए रक्षा क्रय प्रलेख 2025 को मंजूरी दे दी। यह नया दस्तावेज़ न केवल आधुनिक युद्ध की बदलती ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, बल्कि इसका मक़सद घरेलू उद्योगों और युवाओं की प्रतिभा को भी रक्षा क्षेत्र से जोड़ना है।

क्या है नया प्रलेख

पिछली बार रक्षा क्रय प्रलेख 2009 में लागू हुआ था। 16 साल बाद हुए इस संशोधन में आत्मनिर्भर भारत पर खास ज़ोर दिया गया है। रक्षा मंत्रालय हर साल करीब एक लाख करोड़ रुपये का राजस्व व्यय करता है। अब यह खरीद प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, तेज़ और सरल बनेगी। इससे तीनों सेनाओं को ज़रूरी उपकरण और संसाधन समय पर और उचित लागत पर मिल सकेंगे।

घरेलू उद्योगों को बढ़ावा

नए नियमों के तहत निजी उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों को रक्षा उत्पादन में सक्रिय भागीदारी का मौका मिलेगा। अब तक रक्षा सार्वजनिक उपक्रम (DPSUs) का दबदबा रहा करता था, लेकिन नए प्रावधान निजी खिलाड़ियों के लिए बराबरी का अवसर देंगे।

स्टार्टअप और युवा इंजीनियरिंग छात्रों को भी अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। IITs, IISc और अन्य प्रमुख संस्थानों के साथ मिलकर नए हथियारों और स्पेयर्स का स्वदेशी डिज़ाइन और विकास किया जा सकेगा।

उद्योगों के लिए राहत

अब तक रक्षा अनुबंधों में देरी पर भारी-भरकम जुर्माने (Liquidated Damages) लगाए जाते थे। इससे उद्योगों को काफी नुकसान उठाना पड़ता था। नए प्रलेख में विकास चरण के दौरान कोई जुर्माना नहीं लगेगा और प्रोटोटाइप तैयार होने के बाद केवल 0.1 प्रतिशत की नाममात्र की कटौती होगी। अधिकतम दंड घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। यह प्रावधान उन आपूर्तिकर्ताओं के लिए राहत की तरह है जो ईमानदारी से समय पर काम करने की कोशिश करते हैं लेकिन थोड़ी देर से डिलीवरी हो पाती है।

गारंटी और सहयोग

उद्योगों को पाँच साल तक और विशेष परिस्थितियों में दस साल तक ऑर्डर की गारंटी मिलेगी। इससे निवेशकों को स्थिरता का भरोसा मिलेगा। साथ ही, सेना तकनीकी जानकारी और उपकरण साझा कर उद्योगों की मदद करेगी।

तेज़ निर्णय और समय पर भुगतान

अब निचले स्तर पर तैनात वित्तीय प्राधिकरणों को अधिक अधिकार मिलेंगे। इसका सीधा फायदा यह होगा कि फाइलें ऊपर-नीचे नहीं भटकेंगी और फैसले समय पर हो जाएंगे। साथ ही, आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान भी बिना देरी के होगा।

मरम्मत और रखरखाव में सुधार

वायुसेना और नौसेना के जटिल प्लेटफॉर्मों की मरम्मत और रखरखाव में तेजी लाने के लिए 15 प्रतिशत अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। इससे उपकरण लंबे समय तक बंद नहीं रहेंगे और न्यूनतम देरी के साथ संचालन में लौट आएंगे।

निविदा प्रणाली में बदलाव

नए प्रलेख में अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लेने की शर्त खत्म कर दी गई है। अब निविदाएँ पूरी तरह प्रतिस्पर्धात्मक आधार पर होंगी। 50 लाख रुपये तक की खरीद के लिए सीमित निविदा का विकल्प रखा गया है और बड़ी खरीद के लिए सरकार-से-सरकार समझौते को भी सरल बनाया गया है।

क्या होगा बड़ा असर

इस प्रलेख से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा को बड़ा बल मिलेगा। घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, युवाओं को नवाचार का मंच मिलेगा और सेना को ज़रूरी उपकरण समय पर उपलब्ध होंगे। इससे देश की सैन्य तैयारी और मजबूत होगी और विदेशी आयात पर निर्भरता घटेगी।

 कुल मिलाकर, रक्षा क्रय प्रलेख 2025 को देशी उद्योग, युवाओं की प्रतिभा और सेनाओं की जरूरतों के बीच सेतु के रूप में देखा जा रहा है। यह न केवल रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम है, बल्कि भारत की सैन्य शक्ति को भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान देगा।

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