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मजबूरी में सुपरवाइजर के तौर पर काम कर रहे हैं पिंडर घाटी के रजिस्टर्ड ठेकेदार

-हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली, 22 फरबरी। उत्तराखंड सरकार की नीतियों के चलते ‘ई’ से लेकर ‘बी’ क्लास में पंजीकृत ठेकेदारों को मजबूरन अपनी आजीविका के संचालन के लिए कंपनी के मुन्सी के तौर पर कार्य करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। हालांकि कंपनी ने पंजीकृत राजकीय ठेकेदारों को मुन्सी का नाम ना देकर पर्यवेक्षक/प्रबंधक का पद नाम दे कर पंजीकृत ठेकेदारों का कुछ मान रखने का प्रयास किया हैं।

दरसअल उत्तराखंड सरकार के द्वारा नंदा देवी राजजात के तहत थराली -देवाल-मंदोली-वांण मोटर सड़क राज्य राजमार्ग संख्या 90 के 52.200 किलोमीटर में हॉट मिक्स के माध्यम से सतह सुधार और मजबूतीकरण के कार्य के लिए 32 करोड़ 69 लाख 39 हजार रूपयों की स्वीकृति प्रदान की थी,इस स्वीकृति के बाद लोक निर्माण विभाग थराली ने अधिक्षण अभियंता 7 वां वृत्त लोनिवि गोपेश्वर के माध्यम से अलग-अलग पार्टों में निविदा आमंत्रित ना करवां कर स्वीकृति धनराशि के विरुद्ध एक मुश्त एक ही ई निविदा आमंत्रित की गई। ई निविदा के तहत सबसे कम दर दिए जाने पर अग्रवाल ब्रदर्स जेवी कैलाश हिलवेज इंजीनियरिंग एसोसिएट्स ऋषिकेश के नाम निविदा खुल गई। निविदा खुलने के बाद बकाया कंपनी ने इसी वर्ष 24 जनवरी को कार्य का अनुबंध गठित करवा लिया हैं। अनुबंध बनने के बाद सड़क पर कार्य शुरू कर दिया गया है।

काम शुरू होने के बाद से ही कंपनी पर आरोप लगने लगे कि उसके द्वारा स्थानीय लोक निर्माण विभाग सहित अन्य तमाम सरकारी विभागों में पंजीकृत राजकीय ठेकेदारों को सिविल वर्क के कार्य को सम्पन्न करने के लिए पेटी-ठेकेदारी प्रथा के तहत कार्यों का आवंटन कर दिया हैं। विभिन्न मंचों पर लगातार सब-कान्ट्रैक्टर्स का मामला उठने के बाद लोनिवि थराली के अधिकारियों ने कंपनी से पेटी कांट्रैक्ट के संबंध में स्थिती  स्पष्ट करने एवं साईड की पूरी जानकारी मांगी, कंपनी ने जो जानकारी विभाग को दी हैं उसे देख सभी चौंकें बगैर नही रह पाएं हैं।
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पुख्ता सूत्रों के अनुसार कंस्ट्रक्शन कंपनी के द्वारा थराली- वांण सड़क पर कार्य करने के लिए एक प्रोजेक्ट मैनेजर,साइट इंजीनियर, पर्यावरण इंजीनियर,मात्रा सर्वेक्षक, निर्माण सुरक्षा अधिकारी के अलावा कार्य पर्यवेक्षक के लिए एक -एक व्यक्ति को तैनात किया गया हैं। इसके अलावा कंपनी के द्वारा कुल 13 पर्यवेक्षक/प्रबंधकों को तैनात करने की जानकारी दी गई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को सौंपी गई सूची के सिरीयल नंबर 10 से 19 तक जो पर्यवेक्षक/प्रबंधकों के नाम अंकित किए गए हैं, वे सभी 10 व्यक्ति लोनिवि के अलावा अन्य कई सरकारी विभागों में बाकायदा ‘ई’ से लेकर ‘बी’ क्लास श्रेणियों में राजकीय ठेकेदार के रूप मे पंजीकृत हैं। यहां पर अब यह सवाल उठने लगा हैं, कि अगर पंजीकृत राजकीय ठेकेदार कंपनी के पर्यवेक्षक/ प्रबंधक हैं तो क्या कंपनी उन्हें वेतन का भुगतान कर रही हैं ? अगर कर रही है तों किस तरह आने वाले दिनों में निश्चित ही लोनिवि एवं कंपनी प्रबंधन को इसका उत्तर आम जनता, जनप्रतिनिधियों को देना ही होगा।
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थराली-वांण राजमार्ग श्री नदादेवी राजजात यात्रा के तहत कराएं जा रहें कार्य को लेकर राज्य सरकार के ऊपर भी कई प्रश्न उठने लगे हैं। मसलन सरकार हमेशा ही बड़े-बड़े मंचों पर स्थानीय ठेकेदारों के हितों के संरक्षण करने, बड़े-बड़े कामों को टुकड़ों में बांट कर स्थानीय ठेकेदारों को रोजगार मुहैया करवाने की बातें बढ़-चढ़कर करते आ रही हैं परंतु धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही हैं। थराली से वांण 52 किमी का एक ही ई टेंडर लगा कर सरकार ने साबित किया है कि उसे छोटे व स्थानीय ठेकेदारों से कुछ भी लेना-देना नही हैं।जानकारों का मानना हैं कि 52 किमी लंबी सड़क पर काफी मात्रा में सिविल वर्क के तहत दिवालों, वायरक्रेड़ो,,पुलम कांक्रीट,स्कवरों, नालियों का निर्माण होना हैं, इसके छोटे छोटे जॉब बना कर स्थानीय ठेकेदारों को काम दिया जा सकता था, और 22 किमी लंबाई में हॉट मिक्स का कार्य बड़े टेंडर के माध्यम से करवा जा सकता था। किंतु सरकार ने ऐसा कुछ नही किया। परंतु जो कार्य सरकार नही कर पाईं वह कार्य निर्माण का कार्य प्राप्त करने वाली कंपनी कर रही हैं, हालांकि कंपनी ने राजकीय ठेकेदारों का पदनाम बदल कर रख दिया हैं

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