भिखारी निकला करोड़पति, दया को भुनाया और सूदखोरी से भी जुटाया
इंदौर। जिसे लोग वर्षों से दया की नज़र से देखते थे, जिसके सामने सिक्के डालकर पुण्य कमाने की भावना रखते थे, वही व्यक्ति प्रशासन के “रेस्क्यू” अभियान में एक दिन ऐसा बेनकाब हुआ कि अधिकारी भी हैरान रह गए। इंदौर के सराफा इलाके में भीख मांगने वाला यह शख्स कोई बेसहारा नहीं, बल्कि करोड़ों की संपत्ति का मालिक और पेशेवर साहूकार निकला।
“भिखारी-मुक्त इंदौर” अभियान के तहत जब नगर निगम और समाज कल्याण विभाग की टीम ने सड़क किनारे बैठे इस व्यक्ति को पुनर्वास के लिए उठाया, तो उसकी कहानी पल भर में पलट गई। नाम सामने आया— मांगीलाल।
सड़क से सीधे फाइलों में करोड़ों की एंट्री
प्रशासन को शुरू में लगा कि यह एक सामान्य मामला है। लेकिन जब मांगीलाल के पते, बैंक खातों और संपत्तियों की जांच शुरू हुई तो परत-दर-परत एक अलग ही तस्वीर उभरती चली गई।
जांच में सामने आया कि मांगीलाल के पास शहर के अलग-अलग इलाकों में तीन मकान, एक स्विफ्ट डिज़ायर कार (ड्राइवर सहित) और तीन ऑटो-रिक्शा हैं, जिन्हें वह किराये पर चलवाता है। हैरानी की बात यह भी कि एक मकान उसे सरकारी आवास योजना के तहत भी मिला हुआ था।
भीख नहीं, असली कमाई ब्याज से
सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब पता चला कि मांगीलाल का असली धंधा पैसे उधार देना है। सराफा और आसपास के इलाकों के छोटे व्यापारियों को वह नकद रकम ऊँचे ब्याज पर देता था।
बताया जा रहा है कि भीख से इकट्ठा किया गया पैसा ही उसके इस सूदखोरी नेटवर्क की शुरुआती पूंजी था, जिसे उसने वर्षों में बढ़ाकर लाखों-करोड़ों में बदल दिया।
दया की भावना का सुनियोजित दोहन
मांगीलाल जानबूझकर खुद को असहाय और मजबूर दिखाता था। वही पुराने कपड़े, वही सड़क किनारे बैठने का ढंग, ताकि किसी को शक न हो। लोग उसे रोज़ देखते थे, लेकिन कोई नहीं जानता था कि शाम होते-होते वही “भिखारी” कार में बैठकर अपने घर लौटता है।
प्रशासन भी चौंका, अब कानूनी शिकंजा
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह मामला भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान की सबसे चौंकाने वाली घटनाओं में से एक है। अब यह भी जांच की जा रही है कि मांगीलाल ने सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग तो नहीं किया और उसका साहूकारी कारोबार कानूनन वैध था या नहीं।
अधिकारियों के मुताबिक, यह घटना समाज के लिए भी एक सबक है कि हर दया की तस्वीर सच नहीं होती, और हर भिखारी मजबूर ही हो, यह ज़रूरी नहीं।
