शिक्षा/साहित्य

प्रधानाध्यापकों के लिए RLEK ने तीन दिवसीय क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया

देहरादून, 12 जनवरी  । रूरल लिटिगेशन एंड एंटाइटलमेंट केंद्र (RLEK) द्वारा 10 से 12 जनवरी 2026 तक आरएलईके संचालित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के लिए तीन दिवसीय क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य डिजिटल दक्षता को सुदृढ़ करना, नेतृत्व कौशल विकसित करना, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को अपनाना तथा उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के मोहंड क्षेत्र स्थित आरएलईके विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता को और बेहतर बनाना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ 10 जनवरी को पंजीकरण के साथ हुआ। उद्घाटन एवं स्वागत सत्र में आरएलईके की अध्यक्षा श्रीमती प्रतिमा मेनन ने संगठन की परिवर्तनकारी यात्रा पर प्रकाश डालते हुए ग्रामीण शिक्षा और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में आरएलईके की भूमिका को रेखांकित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सुधी नाथ, निदेशक (सोशल एवं पब्लिक हेल्थ डिवीजन), बीसीटीए इंडिया ने प्रधानाध्यापकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए समावेशी एवं मूल्य-आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने ग्रामीण शिक्षा के प्रति समर्पण के लिए प्रधानाध्यापकों को सम्मानित भी किया।

प्रथम दिन खेलों के माध्यम से आइस-ब्रेकिंग गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इसके साथ ही आरएलईके के विधि प्रशिक्षु छात्रों द्वारा बेहतर शिक्षण वातावरण के निर्माण पर संवादात्मक सत्र तथा श्रीमती रेखा ध्यानी द्वारा सामुदायिक सहभागिता आधारित छात्र नामांकन रणनीतियों पर चर्चा की गई।

द्वितीय दिन श्री शैलेश ध्यानी द्वारा डिजिटल क्षमता पर प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें दीक्षा ऐप तथा कक्षा शिक्षण में एआई टूल्स के उपयोग का प्रदर्शन किया गया। साथ ही सहभागितापूर्ण एवं आनंददायक शिक्षण विधियों पर भी सत्र आयोजित हुए। आरएलईके की अध्यक्षा श्रीमती प्रतिमा मेनन ने बाल सुरक्षा दिशा-निर्देशों एवं पॉश (कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम) विषय पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया।

इस दिन का एक प्रमुख आकर्षण मुख्य अतिथि अधिवक्ता रेनू डी. सिंह (जेंडर राइट्स एक्टिविस्ट) का प्रेरक संबोधन रहा। उन्होंने पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों, राष्ट्रीय गौरव और विद्यालयों की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने आरएलईके के संस्थापक एवं पद्मश्री से सम्मानित स्व. श्री अवधेश कौशल के सामाजिक न्याय के लिए किए गए योगदान को नमन किया तथा श्रीमती प्रतिमा मेनन के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की।

तीसरे एवं अंतिम दिन सभी सत्रों की समीक्षा, प्रमाणपत्र वितरण एवं समापन समारोह आयोजित किया गया। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताते हुए आरएलईके के प्रति आभार व्यक्त किया।

आरएलईके मोहंड विद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिका सुश्री विजय लक्ष्मी ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम डिजिटल क्षमता और नेतृत्व विकास की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी रहा। वहीं प्रधानाध्यापक श्री सुलेख चंद ने कहा कि इस प्रशिक्षण से वे छात्रों के साथ केवल शिक्षक नहीं, बल्कि सह-शिक्षार्थी के रूप में भी जुड़ सकेंगे।

कार्यक्रम का समापन आरएलईके की ग्रामीण विद्यालयों के समग्र विकास, शैक्षणिक नेतृत्व और क्षमता निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता के सशक्त संदेश के साथ हुआ।

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