कुनो में गर्जना: गामिनी के तीन शावकों ने भारत को चीतों की नई उम्मीद दी

नयी दिल्ली, 18 फरबरी। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज एक खुशी भरी घोषणा की, जो भारत की वन्यजीव संरक्षण यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ रही है। मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में दक्षिण अफ्रीकी चीता गामिनी ने तीन स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। यह जन्म ठीक उस ऐतिहासिक क्षण पर हुआ है जब दक्षिण अफ्रीका से चीतों के भारत आगमन को तीन वर्ष पूरे हो चुके हैं—एक ऐसा पल जब 1952 में विलुप्त हो चुकी दुनिया की सबसे तेज़ दौड़ने वाली प्रजाति अपनी जन्मभूमि पर फिर से अपनी दहाड़ के साथ लौट रही है।
श्री यादव ने एक्स पर पोस्ट करते हुए इसे “एक गर्जन भरा नया अध्याय” (A roaring new chapter) बताया और गामिनी के साथ तीन छोटे शावकों की तस्वीर साझा की। गामिनी, जो अब दूसरी बार मां बनी है, के इन तीन शावकों के साथ भारत में जन्मे शावकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है, जबकि कुल चीतों की संख्या 38 पहुंच गई है। यह उपलब्धि प्रोजेक्ट चीता की सफलता का जीवंत प्रमाण है—एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम जो न केवल एक विलुप्त प्रजाति को वापस ला रहा है, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बहाल करने की दिशा में मजबूत कदम उठा रहा है।
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प्रोजेक्ट चीता: एक ऐतिहासिक शुरुआत
सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं आठ नामीबियाई चीतों को कुनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा था, जो भारत में चीतों की पुनर्स्थापना की शुरुआत थी। उसके बाद दक्षिण अफ्रीका से और चीते लाए गए। चीता भारत की धरती से 1952 में विलुप्त हो चुका था, मुख्यतः शिकार और आवास हानि के कारण। प्रोजेक्ट चीता का उद्देश्य अफ्रीकी चीतों (Asiatic cheetah से अलग subspecies) को भारत में बसाना है, ताकि जैव-विविधता बहाल हो और शीर्ष शिकारी की भूमिका से पारिस्थितिकी संतुलित रहे।
कुनो राष्ट्रीय उद्यान (श्योपुर जिला, मध्य प्रदेश) को इसके लिए चुना गया क्योंकि यहां 748 वर्ग किलोमीटर का कोर क्षेत्र है, घने जंगल, घास के मैदान, प्रचुर शिकार (चीतल, संभर, नीलबकरी आदि) और न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप। उद्यान में चीतों की निगरानी के लिए रेडियो-कॉलर, कैमरा ट्रैप, विशेष वेटरनरी टीम और फील्ड स्टाफ तैनात हैं।
गामिनी और अन्य सफल प्रजनन
गामिनी का यह दूसरा लिटर है—पहला मार्च 2024 में हुआ था। इस जन्म से भारत में कुल नौ सफल लिटर (प्रजनन) दर्ज हो चुके हैं, जिनमें अधिकांश कुनो में ही हैं। हाल ही में फरवरी 2026 की शुरुआत में नामीबियाई चीता आशा ने पांच शावकों को जन्म दिया था, जो उसका दूसरा लिटर था। इन सफलताओं से साफ है कि आयातित चीते भारतीय परिस्थितियों में अनुकूलित हो रहे हैं, प्रजनन कर रहे हैं और स्वस्थ संतान पैदा कर रहे हैं।
हालांकि शुरुआती वर्षों में चुनौतियां रहीं—कुछ चीतों की मौत संक्रमण, अनुकूलन समस्या या अन्य कारणों से हुई—लेकिन अब प्रजनन दर बढ़ रही है और जीवित शावकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कुल 38 चीतों में से अधिकांश कुनो में हैं, जबकि कुछ गांधी सागर अभयारण्य जैसे अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किए जा रहे हैं।
संरक्षण की बड़ी जीत और भविष्य
यह जन्म सिर्फ संख्या का इजाफा नहीं, बल्कि एक थीम है—प्रकृति के साथ सामंजस्य, संरक्षण की जीत और आने वाली पीढ़ियों के लिए जैव-विविधता की विरासत। चीता शीर्ष शिकारी होने के कारण पारिस्थितिकी तंत्र को नियंत्रित रखता है, जिससे अन्य प्रजातियां भी लाभान्वित होती हैं। पर्यावरण मंत्री ने इसे “संरक्षण की शक्तिशाली प्रतीक” बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही गति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में चीतों की आबादी स्थिर हो जाएगी और अन्य राष्ट्रीय उद्यानों (जैसे राजस्थान या गुजरात के क्षेत्र) में भी इन्हें बसाया जा सकेगा। प्रोजेक्ट चीता अब दीर्घकालिक सफलता की ओर अग्रसर है, जो भारत की पर्यावरण नीति और वैश्विक संरक्षण प्रयासों में एक मिसाल बन रहा है।
कुल मिलाकर, गामिनी के तीन शावकों का जन्म प्रोजेक्ट चीता की प्रगति का प्रतीक है। देश भर में वन्यजीव प्रेमी इस खबर से उत्साहित हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही भारत फिर से चीतों की तेज़ रफ्तार और दहाड़ से गूंज उठेगा। यह न केवल एक प्रजाति की वापसी है, बल्कि मानव और प्रकृति के बीच खोए हुए संतुलन को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
