सचिव ने ऋषिकेश के संस्कृत विद्यालयों का किया निरीक्षण, योजनाओं की दी जानकारी

ऋषिकेश, 6 अप्रैल। संस्कृत शिक्षा विभाग के शासन सचिव दीपक कुमार गैरोला ने तीर्थ एवं संस्कृत नगरी ऋषिकेश का भ्रमण कर विभिन्न संस्कृत विद्यालयों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सबसे पहले श्री मुनीश्वर वेदांग संस्कृत विद्यालय का निरीक्षण किया। इसके बाद कृष्ण कुंज संस्कृत विद्यालय तथा श्री भरत संस्कृत विद्यालय, ऋषिकेश का भी औचक निरीक्षण किया।
संस्कृत शिक्षा विभाग के सचिव के आगमन से संस्कृत विद्यालयों में उत्साह और ऊर्जा का संचार देखने को मिला। निरीक्षण के दौरान सचिव दीपक कुमार गैरोला ने राज्य सरकार द्वारा संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार प्रदेश में संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राज्य में 13 संस्कृत ग्रामों की स्थापना कर संस्कृत को गांव-गांव तक बोलचाल की भाषा बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। साथ ही संस्कृत पढ़ने वाली बालिकाओं तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विद्यार्थियों को क्रमशः गार्गी छात्रवृत्ति और डॉ. भीमराव छात्रवृत्ति प्रदान कर उन्हें संस्कृत अध्ययन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सचिव ने बताया कि संस्कृत शिक्षा विभाग विद्यालयों में साहित्य, व्याकरण, ज्योतिष और वेद जैसे पारंपरिक विषयों के साथ-साथ विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे आधुनिक विषयों को भी पाठ्यक्रम में शामिल कर रहा है, ताकि संस्कृत के विद्यार्थियों को समाज में समान अवसर मिल सकें। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार द्वारा शीघ्र ही संस्कृत के विद्यार्थियों को आईएएस और पीसीएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करवाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि संस्कृत का ज्ञान विश्व को शांति के मार्ग पर ले जाने की क्षमता रखता है। इसके लिए विद्यार्थियों को संस्कृत के साथ-साथ विदेशी भाषाओं का ज्ञान भी आवश्यक है। इस उद्देश्य से विभाग उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के माध्यम से संस्कृत विद्यार्थियों को विदेशी भाषाएं सीखने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगा।
सचिव ने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों से आह्वान किया कि विद्यार्थियों के सामान्य ज्ञान को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से दैनिक समाचार पत्रों का अध्ययन कराया जाए। साथ ही संस्कृत संभाषण को बढ़ावा देने के लिए विद्यालयों एवं छात्रावासों में दैनिक संस्कृत समाचारों का श्रवण अनिवार्य किया जाए। उन्होंने प्रज्ञा चक्षु, मंत्र चिकित्सा जैसे संस्कृत ग्रंथों के गूढ़ ज्ञान के अध्ययन को भी प्रोत्साहित करने पर बल दिया और कहा कि इस दिशा में सरकार हरसंभव सहायता प्रदान करेगी।
इस अवसर पर संस्कृत विभाग के उपनिदेशक वाजश्रवा आर्य, भरत मंदिर संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य सुरेंद्र दत्त भट्ट, श्री मुनीश्वर वेदांग संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. जनार्दन प्रसाद कैरवान, कृष्ण कुंज संस्कृत विद्यालय की प्रधानाचार्या पूजा वशिष्ठ, मनोज द्विवेदी, जितेंद्र प्रसाद भट्ट, शंकर मणि भट्ट, डॉ. भानु प्रकाश उनियाल, शशि गौड़, सुरेश पंत, आचार्य हर्षमणि नौटियाल, प्रियव्रत रतूड़ी तथा सुमित चमोली सहित अन्य शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
