जनरल की चिट्ठी से सेना में हलचल ; महिला कमांडरों की नेतृत्व क्षमता पर उठाये सवाल !
Lt. General Rajeev Puri’s recent observations on women officers in command roles have sparked a nationwide debate on leadership in the Indian Army. Highlighting instances of over-centralized decision-making, lack of empathy, and a perceived sense of entitlement in some cases, the report stresses the need for gender-neutral performance reviews. With eight such women COs in his corps, Lt Gen Puri said an analysis was conducted after an “in-house review” based on the “demonstrated performance” of the officers. Women COs have been exhibiting poor “interpersonal relations”, with an “exaggerated tendency to complain” to senior commanders about their subordinates rather than exercising their own authority and powers first, as well as a “lack of empathy” for officers and troops in their units. “Any professional disagreement or minor argument is viewed as insubordination… The lack of empathy may be attributable to a need to overcompensate,” he said.

-जयसिंह रावत
थल सेना में महिला कमाण्डरों की नेतृत्व क्षमता और सेना पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर पूर्वी कमान के एक वरिष्ठ जनरल के पत्र ने सेना में हलचल मचा दी है। यह पत्र 17 माउंटेंन स्ट्राइक कोर के कमांडर ले. जनरल राजीव पुरी ने महिला कमाडरों को लेकर किये गये एक आन्तरिक आंकलन के आधार पर आर्मी कमांडर को भेजा गया है। लेफ्टिनेंट जनरल राजीव पुरी द्वारा आंकलन के आधार पर लिखे गए इस विस्तृत पत्र में महिला कमान अधिकारियों (COs) के नेतृत्व को लेकर कुछ चिंताएं जाहिर की हैं। पानागढ़ स्थित 17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स द्वारा किए गए विश्लेषण के आधार पर, रिपोर्ट में असहानुभूति की कमी, अत्यधिक केंद्रीकृत निर्णय लेने की प्रवृत्ति और कुछ मामलों में विशेषाधिकार की भावना का उल्लेख किया। उन्होंने नेतृत्व मानकों को बनाए रखने के लिए निरंतर प्रदर्शन समीक्षा और नेतृत्व के अवसरों में लिंग-निरपेक्ष दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उनकी टिप्पणियों ने भारतीय सेना में महिलाओं की बदलती भूमिकाओं और नेतृत्व में आने वाली चुनौतियों पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। उनकी रिपोर्ट महिलाओं द्वारा नेतृत्व की चुनौतियों और उनके योगदान के संतुलित मूल्यांकन की आवश्यकता को रेखांकित करती है। जनरल पूरी का यह पत्र बहुत तेजी से वायरल हो रहा है.
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव पुरी ने महिला अधिकारियों के नेतृत्व को लेकर कुछ चिंताएं जाहिर की हैं। उन्होंने सहानुभूति की कमी, अत्यधिक केंद्रीकृत निर्णय लेने की प्रवृत्ति और कुछ मामलों में विशेषाधिकार की भावना का उल्लेख किया। उन्होंने नेतृत्व मानकों को बनाए रखने के लिए निरंतर प्रदर्शन समीक्षा और नेतृत्व के अवसरों में लिंग-निरपेक्ष दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उनकी टिप्पणियों ने भारतीय सेना में महिलाओं की बदलती भूमिकाओं और नेतृत्व में आने वाली चुनौतियों पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। उनकी रिपोर्ट महिलाओं द्वारा नेतृत्व की चुनौतियों और उनके योगदान के संतुलित मूल्यांकन की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
जनरल पुरी ने कुछ घटनाओं को “गलत अधिकार भावना” और वरिष्ठ अधिकारियों से बार-बार शिकायत करने की प्रवृत्ति के रूप में देखा, बजाय इसके कि वे अपने अधिकारों का प्रयोग करें। उन्होंने यह भी देखा कि कुछ अधिकारी स्वयं निर्णय लेने की पहल नहीं करती हैं। जबकि अन्य अत्यधिक महत्वाकांक्षा के कारण अपनी यूनिट्स में तनाव बढ़ा देती हैं। एक उदाहरण में, एक महिला CO ने सूबेदार मेजर से अपने वाहन का दरवाजा खोलने पर जोर दिया, जो नियमों के विरुद्ध था।
यह रिपोर्ट कुछ चुनौतियों का कारण प्रणालीगत खामियों को मानती है। महिला अधिकारी, अपने पुरुष समकक्षों के विपरीत, नेतृत्व के लिए विशेष प्रशिक्षण से नहीं गुजरी हैं और न ही उन्हें CO की भूमिका से पहले उच्च दबाव वाले परिचालन कार्य सौंपे गए हैं। इस तैयारी की कमी ने कठोर नेतृत्व शैलियों और सैनिकों की कठिनाइयों की सीमित समझ को जन्म दिया है।
इन चुनौतियों के बावजूद, नेतृत्व में महिलाओं का प्रवेश एक बड़ा मील का पत्थर है। आलोचक तर्क देते हैं कि प्रदर्शन की खामियों को समाधान करना आवश्यक है, लेकिन ऐसी रिपोर्टों को महिलाओं की क्षमताओं के बारे में रूढ़ियों को बढ़ावा देने से बचना चाहिए। समर्थक समान अवसर, बेहतर प्रशिक्षण कार्यक्रम और एक सहायक संस्थागत संस्कृति की आवश्यकता पर जोर देते हैं ताकि महिला अधिकारी नेतृत्व की भूमिकाओं में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकें।
यह बहस समावेशी नेतृत्व के महत्व को उजागर करती है, जो सशस्त्र बलों में परिचालन उत्कृष्टता बनाए रखते हुए विविध दृष्टिकोणों को महत्व देता है।
यहाँ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव पुरी द्वारा महिलाओं की नेतृत्व भूमिका पर उनकी चिट्ठी में उठाए गए 18 बिंदुओं का संक्षिप्त विवरण :
- आपसी संबंध: अधीनस्थों के साथ खराब आपसी तालमेल और सहानुभूति की कमी।
- अत्यधिक केंद्रीकरण: नेतृत्व में “मेरा तरीका ही सही” दृष्टिकोण, बिना जिम्मेदारी सौंपे।
- शिकायतों की प्रवृत्ति: समस्याओं को खुद सुलझाने के बजाय वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाना।
- अधिकार का दिखावा: अनुचित तरीके से अधिकार का इस्तेमाल, जैसे प्रतीकात्मक आदेश लागू करना।
- अत्यधिक महत्वाकांक्षा: अत्यधिक प्रदर्शन की मांग से यूनिट में तनाव।
- कम पहल: कुछ अधिकारी नेतृत्व की जिम्मेदारियों में रुचि नहीं दिखाते।
- संघर्ष समाधान: आपसी सम्मान के बजाय शक्ति का उपयोग कर विवाद समाप्त करना।
- पक्षपात: अविश्वास और पूर्वाग्रह का प्रभाव।
- नेतृत्व तैयारी की कमी: पर्याप्त प्रशिक्षण और अनुभव का अभाव।
- संचालन अनुभव: चुनौतीपूर्ण परिचालन कार्यों का अनुभव नहीं।
- निर्देशक नेतृत्व: कठोर नेतृत्व शैली जो टीम के तालमेल को प्रभावित करती है।
- आलोचनात्मक टिप्पणियाँ: अधीनस्थों का अपमान कर खुद श्रेय लेना।
- यूनिट में तनाव: कठोर नेतृत्व शैली से बढ़ता तनाव।
- पक्षपातपूर्ण व्यवहार: सैनिकों के संघर्षों को न समझने की प्रवृत्ति।
- मानव संसाधन प्रबंधन: कर्मचारियों को कठोर तरीके से संभालना।
- नरमी की धारणा: “नरम” न दिखने की कोशिश में कठोर रवैया अपनाना।
- जूनियर अधिकारियों से विवाद: पेशेवर मतभेदों को अनुशासनहीनता समझना।
- दिखावा करने की प्रवृत्ति: वास्तविक नेतृत्व के बजाय छवि निर्माण पर ध्यान।
ये मुद्दे महिला अधिकारियों के नेतृत्व के लिए बेहतर प्रशिक्षण और तैयारी की आवश्यकता को दर्शाते हैं।
(नोट: लेखक वरिष्ठ पत्रकार और संपादक मंडल के मानद सदस्य भी हैं, लेकिन उनके विचारों से एडमिन का सहमत या असहमत होना जरुरी नहीं हैं। .एडमिन )


