क्षेत्रीय समाचार

हनीगाड़ -लौसरी-हाटकल्याणी-देवाल-पूर्णा पेयजल योजना में घोर लापरवाही, गंभीर भ्रष्टाचार का अंदेशा

-रिपोर्ट हरेंद्र बिष्ट-
थराली, 10 जुलाई  । विकास खंड मुख्यालय देवाल सहित तीन अन्य गांवों के ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए निर्मित की जा रही हनीगाड़ -लौसरी-हाटकल्याणी-देवाल-पूर्णा पेयजल योजना प्रारम्भिक दौर में ही विवादों एवं भ्रष्टाचार की भेट चढ़नें का अंदेशा बनने लगा है।

इस योजना में बरती जा रही भारी लापरवाही का खुलासा तब हुआ जबकि पिछले पांच दिनों से देवाल एवं उसके आसपास गांवों में अनियमित पेयजल की आपूर्ति होने की शिकायतों पर थराली विधायक भूपाल राम टम्टा ने हनीगाड़-देवाल -हाटकल्याणी निर्माणाधीन पेयजल योजना के स्रोत से लेकर आगे तक बनी पानी की लाइन का मंगलवार देर रात तक निरीक्षण किया।इस दौरान विधायक ने जो देखा उसे देखकर वे दंग रह गए। उन्होंने इस योजना की उच्चस्तरीय जांच करवाएं जाने की बात की।

दरअसल पिछले लंबे समय से विकास खंड मुख्य देवाल एवं उससे लगे आसपास के गांवों में पानी की अनियमित आपूर्ति के बाद इसी सोमवार को व्यापारियों एवं ग्रामीण ने बाल्टियों, बंटो, गागरों के साथ जुलूस निकाल कर प्रदर्शन करते हुए जल निगम एवं जल संस्थान कर्णप्रयाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।जिस पर मंगलवार को विधायक भूपाल राम टम्टा देवाल पहुंचे एवं चार गांवों के ग्रामीणों की पियास बुझाने के लिए बनाई जा रही हनीगाड़ -देवाल-पूर्णा जोकि करीब ढाई करोड़ रूपयों की लागत से जल जीवन मिशन के तहत निर्मित की जा रही है, के हनीगाड़ स्रोत जोकि मोटर सड़क से करीब तीन किलोमीटर दूर घने जंगलों में है।

देवाल भाजपा मंडल अध्यक्ष उमेश मिश्रा, महामंत्री युवराज बसेड़ा, क्षेत्र पंचायत सदस्य देवाल प्रमोद मिश्रा, हरमल चोटिल के पूर्व क्षेपंस रमेश गड़िया, थराली के भाजपा नेता प्रदीप जोशी विधायक पीआरओ दीपक के साथ निर्मित लाइन से लेकर स्रोत तक देर सायं तक व्यापक निरीक्षण किया।

निरीक्षण करने के बाद लौटे विधायक टम्टा ने यहां बताया कि निर्माणाधीन पेयजल योजना में काफी अधिक खामियां मौजूद हैं। स्रोत पर किया गया कार्य जहां लापरवाही भरा हुआ हैं। वही बनाई गई पाइप लाइन तकनीकी मानकों से कोसों दूर हैं।

बताया कि जहां स्रोत से एक पाइप 80 एमएम का लगाया गया है। उसके बाद सीधा 65 एमएम का करीब 300 मीटर पाइप बिछाईं गई हैं। उसके बाद फिर 80 एमएम के पाइप लगाया गया हैं, और फिर 65 एमएम के पाइप बिछाएं गयें।जो समझ से परे है।इसके अलावा अधिकांश पाइप लाइन को दबाया तक नही गया हैं। निर्मित लाइन पर कई स्थानों पर पानी लिकेज हो रहा है।

उन्होंने पाइपों,साकेटो, यूनियनों आदि क्वालिटी पर भी सवाल उठाते हुए निर्माण कार्य में भारी अनियमित बरते जाने की बात स्वीकार की विधायक ने रोष जताते हुए कहा कि वे इस योजना की उच्चस्तरीय जांच के लिए मुख्य सचिव को पत्र भेज रहे हैं।

विधायक ने गुस्साएं हुए बताया कि उन्होंने देवाल में पेयजल संकट के संबंध में जल निगम एवं जल संस्थान कर्णप्रयाग डीविजन के अधिशासी अभियंताओं से टेलीफोनिक वार्ता कर देवाल क्षेत्र में पानी की नियमित आपूर्ति करवाने एवं नवनिर्मित हो रही पेयजल योजना का निरीक्षण करने की बात कही थी, किंतु दोनों ही विभागों के सक्षम अभियंता उनके निरीक्षण के दौरान मौजूद नही रहें इस संबंध में भी वे सक्षम उच्चाधिकारियों से वार्ता करेंगे। विधायक के निरीक्षण एवं उसके द्वारा उठाए गए सवालों के बाद पेयजल योजना पर कई तरह के प्रश्न उठने लगे हैं।
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थराली के विधायक टम्टा किस कदर देवाल क्षेत्र में पानी की समस्या को लेकर जल निगम एवं जल संस्थान के प्रति गुस्से में थे उसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता हैं कि देवाल -सवाड़ मोटर सड़क के सत्तूवापानी बैंड़ से जब पैदल चले तो नई जोड़ी गई लाइन को देख कर और भी गुस्से से भर उठे। आगे बढ़ाने के लिए खतरनाक पतले रास्ते एवं इस रस्ते में भारी मात्रा में जोंकों के लगने की परवाह किए बगैर कई बार गिरते हुए स्रोत तक पहुंचे, हालांकि स्रोत से करीब 30 मीटर पहले खड़ी चट्टान होने एवं पाइप लाइन चट्टान में हवा में लटके होने के कारण विधायक स्रोत तक नही पहुंचे किंतु कुछ युवाओं को स्रोत पर भेज कर फोटो, वीडियो लाने को भेजा। उसके बाद ही वे देर सायं वापस लौटे।
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इस संबंध में जल निगम कार्णप्रयाग के अधिशासी अभियंता अरूण प्रताप सिंह का कहना है कि अभी मात्र 6-7 किमी लाइन का ही निर्माण हुआ हैं। जबकि 18 किमी से अधिक लाइन बिछाने,3 टैंकों,के साथ ही कुछ नए कनेक्शनों का कार्य होना हैं। जहां तक स्रोत से आगे करीब तीन सौ मीटर 65 एमएम के पाइपों को लगाने का सवाल है,वह मई माह में देवाल में जल संस्थान के पूराने स्रोत में पानी कम होने के बाद जल संस्थान के अनुरोध पर वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर लगाएं गऐ हैं। यहां पर 80 एमएम के ही पाइप लगाया जाएगा।65 एमएम के पाइप निकालें जाएंगे। बताया कि इस योजना पर ठेकेदार के नाम पर करीब 2 करोड़ 48 लाख का अनुबंध गठित किया गया है।

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