श्रीमद्भागवत कथा: भक्ति और श्रद्धा से गूंजा काण्डई चन्द्रशिला
पोखरी, 12 अप्रैल (राणा)। विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत काण्डई चन्द्रशिला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन आध्यात्मिक चेतना, भक्ति और श्रद्धा का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा व्यास विष्णु प्रसाद किमोठी ने गूढ़ आध्यात्मिक भावों से परिपूर्ण प्रवचन देते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीव को विषय-विकारों के विष से मुक्त कर उसे परमात्मा की शरण में ले जाने का दिव्य माध्यम है।
कथा के पांचवें दिन व्यास किमोठी ने भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की अद्भुत भक्ति गाथा का वर्णन करते हुए बताया कि सच्ची भक्ति हर परिस्थिति में अडिग रहती है। वृत्रासुर की भगवान के प्रति अनन्य भक्ति और विरह भावना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब जीव का हृदय पूर्ण रूप से ईश्वर में लीन हो जाता है, तब उसे संसार के सुख-दुख का भान नहीं रहता।
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वामन अवतार की कथा सुनाते हुए उन्होंने राजा बलि के त्याग, समर्पण और भगवान के प्रति अटूट विश्वास को जीवन का आदर्श बताया। वहीं भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की कथा सुनाकर पूरे वातावरण को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। रात्रि 12 बजे जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की झांकी प्रस्तुत की गई, पूरा कथा स्थल “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा।
सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ कथा स्थल पर उमड़ पड़ी थी। भिकोना, रडुवा डुंगर, गुणम, नैल, पोखरी, जौरासी, गुनियाला, किमोठा तथा गोपेश्वर पीजी कॉलेज के प्राध्यापक भी सपरिवार कथा श्रवण हेतु पहुंचे। जन्मोत्सव के अवसर पर निकाली गई आकर्षक झांकी ने सभी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अपने प्रवचन में व्यास किमोठी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन बचपन से ही संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने हर परिस्थिति में धर्म और प्रेम का मार्ग नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि यह संसार दुखालय है, इसलिए मनुष्य को अपने उद्धार के लिए संतों और शास्त्रों का आश्रय लेना चाहिए। संत हृदय को निर्मल करते हैं और शास्त्र मन की ग्रंथियों को खोलकर आत्मा को शुद्ध बनाते हैं।
उन्होंने पूतना प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान का स्वभाव असीम करुणा से भरा है, जिन्होंने विष देने वाली पूतना को भी मातृत्व का स्थान देकर धात्री गति प्रदान की। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को वासनाओं के विष से मुक्त कर उसे ब्रह्मानंद और परमानंद की अनुभूति कराती है तथा सांसारिक मोह-माया से विरक्त करती है।
कथा के दौरान कीर्तन मंडली द्वारा प्रस्तुत भजन-कीर्तन ने वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भजनों पर झूमते हुए ईश्वर भक्ति में लीन नजर आए और पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा। पांचवें दिन पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र सिंह भण्डारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा स्थल पर पहुंचकर कथा का रसपान किया।
यह धार्मिक आयोजन कुंवरी देवी नेगी द्वारा अपने स्वर्गीय पति की पुण्य स्मृति में तथा भरत सिंह नेगी, डॉ. जगमोहन सिंह नेगी और भूपेंद्र सिंह नेगी द्वारा अपने स्वर्गीय पिता सूबेदार ध्यान सिंह नेगी के पितृमोक्ष के निमित्त आयोजित किया जा रहा है। आयोजन में नेगी परिवार की सक्रिय भूमिका के साथ ही क्षेत्रीय ग्रामीणों का सराहनीय सहयोग प्राप्त हो रहा है।
इस अवसर पर आचार्य रामेश्वर किमोठी, आचार्य ब्रह्मानंद किमोठी, आचार्य अनूप किमोठी, आचार्य संजय किमोठी, राजेंद्र सिंह नेगी, रघुवीर नेगी, देवेंद्र नेगी, सुरेंद्र नेगी, सुमन नेगी, ताजबर सिंह नेगी, मातबर सिंह नेगी, विक्रम नेगी, मुकेश नेगी, मनोज नेगी, डॉ. बृजेंद्र कठैत, संतोष चौधरी, अंशुल भंडारी, रणजीत सिंह राणा, हेमराज सिंह राणा, डॉ. दिनेश सती, डॉ. दर्शन सिंह नेगी, डॉ. मनीष मिश्रा, डॉ. मनोज सहित कीर्तन मंडली के सदस्य, नेगी परिवार के सभी सदस्य, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे उपस्थित रहे।
