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मूल निवास और सशक्त भू-कानून को लेकर गांधी पार्क में धरना देगी मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति

 

देहरादून, 16 नवंबर। मूल निवास और भू-कानून के मुद्दों पर सरकार की लगातार अनदेखी को लेकर मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति ने कड़ा आक्रोश जताया है और पूरे उत्तराखंड में व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी है। समिति की देहरादून में आयोजित बैठक में 30 नवंबर को गांधी पार्क में धरना देने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।

समिति के संयोजक लूशुन टोडरिया ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड सरकार ने वर्षों से भू-कानून और मूल निवास के मुद्दों को जानबूझकर उलझा कर रखा है। उन्होंने कहा कि रजत जयंती वर्ष के दौरान आयोजित विधानसभा सत्र में भी मूल निवास पर हुई चर्चा को सुनियोजित तरीके से भटकाया गया।
टोडरिया ने मांग की कि यदि सरकार वास्तव में गंभीर है, तो वह पहाड़ी क्षेत्रों में पांचवीं अनुसूची के आधार पर मूल निवास और सशक्त भू-कानून लागू करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा।

समिति के विधि सलाहकार आशुतोष शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड में मूल निवासियों के अधिकारों पर लगातार चोट की जा रही है और राज्य की मूल अवधारणा को कमजोर करने की साजिशें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

समिति के सदस्य देवेंद्र बेलवाल ने सरकार द्वारा लागू भू-कानून को जनहित के विपरीत बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में जमीनों की लूट अब भी खुलेआम जारी है, जबकि सरकार भू-कानून के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है।

राज्य आंदोलनकारी गुड्डी थपलियाल ने कहा कि 42 शहादतों के बावजूद राज्य आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखंड आज तक साकार नहीं हो पाया है। दुर्भाग्य है कि जंगल-जमीन के अधिकारों के लिए अब भी संघर्ष करना पड़ रहा है।

आंदोलनकारी सरिता जुयाल और प्रमोद काला ने कहा कि यदि जल्द ही मजबूत भू-कानून और मूल निवास लागू नहीं किया गया, तो आंदोलन को गांव-गांव तक ले जाया जाएगा।

बैठक में मनवीर भंडारी, सुमित थपलियाल, राकेश नेगी, चंद्रमोहन जोशी, कनिष्क जोशी, प्रियांशु नेगी, केशवानंद, देवेंद्र हिंदवान, जसवंत बिष्ट, सौरभ रावल आदि मौजूद रहे।

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