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महाविनाश की दहलीज पर मध्य पूर्व: ईरान के करीब पहुँचा अमेरिकी ‘आर्मडा’, युद्ध की आहट तेज

वॉशिंगटन/तेहरान, 27 जनवरी । अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव अब अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान की ओर एक विशाल नौसैनिक बेड़ा (Armada) भेजने की घोषणा के बाद दुनिया भर में युद्ध की आशंका गहरा गई है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी परमाणु संचालित विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ मध्य पूर्व के रणनीतिक जलक्षेत्र में तैनात हो चुका है।

प्रमुख घटनाक्रम: क्यों बढ़ा तनाव?

  • ईरान में हिंसक दमन: ईरान में पिछले दिसंबर से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के खिलाफ तेहरान की कड़ी कार्रवाई तनाव का मुख्य कारण बनी है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, प्रदर्शनों में अब तक 5,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि “नरसंहार” नहीं रुका, तो अमेरिका मूकदर्शक नहीं रहेगा।
  • अमेरिकी बेड़े की तैनाती: USS अब्राहम लिंकन के साथ कई मिसाइल डिस्ट्रॉयर और उन्नत वायु रक्षा प्रणालियाँ (THAAD और Patriot) क्षेत्र में पहुँच चुकी हैं। इसके अलावा, जॉर्डन और अन्य बेस पर F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमानों की अतिरिक्त टुकड़ियाँ तैनात की गई हैं।
  • जुबानी जंग और धमकियाँ: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने पलटवार करते हुए कहा है कि उनकी “उंगलियाँ ट्रिगर पर हैं” और अमेरिकी बेड़ा उनके लिए केवल एक “आसान लक्ष्य” है।

युद्ध की कितनी है संभावना?

​विशेषज्ञों के अनुसार, स्थिति फिलहाल ‘सीमित सैन्य हमले’ की ओर इशारा कर रही है:

  1. सर्जिकल स्ट्राइक का विकल्प: अमेरिका पूर्ण युद्ध के बजाय ईरान के परमाणु केंद्रों या IRGC के मुख्यालयों पर सटीक मिसाइल हमले कर सकता है।
  2. शासन परिवर्तन (Regime Change): ट्रंप प्रशासन के कुछ बयानों से संकेत मिलता है कि अमेरिका इस सैन्य दबाव के जरिए ईरान में सत्ता परिवर्तन की जमीन तैयार करना चाहता है।
  3. इज़राइल का समर्थन: इज़राइल की सेना भी ‘हाई अलर्ट’ पर है और वह किसी भी संभावित संघर्ष में अमेरिका का साथ देने के लिए तैयार दिख रही है।

भारत और दुनिया पर प्रभाव

​यदि संघर्ष शुरू होता है, तो इसका सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे भारत जैसे देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत ने पहले ही क्षेत्र में फंसे अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है।

ताजा स्थिति: अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि सेना “तैयार” है, लेकिन वे अब भी उम्मीद करते हैं कि युद्ध की नौबत नहीं आएगी। हालांकि, तेहरान के कड़े रुख को देखते हुए कूटनीतिक समाधान की गुंजाइश कम होती जा रही है।

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