मधुमेह रोगियों की सहायता के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम
- भारतीय जनऔषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत जेनेरिक दवाओं जैसी पहल के माध्यम से इंसुलिन सहित मुफ्त आवश्यक दवाओं का प्रावधान और
- आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) के तहत आंतरिक रोगी देखभाल के लिए एनएचएम उपचार की मुफ्त दवा सेवा पहल भी उपलब्ध है।
नयी दिल्ली, 9 मार्च ( PIB) । इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (आईडीएफ) एटलस के 10वें संस्करण, 2021 के अनुसार, भारत में 20 से 79 वर्ष की आयु के बीच 74.2 मिलियन लोग मधुमेह से पीड़ित हैं। भारत सरकार का स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत, कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीडीसीएस) के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करता है। यह सहायता राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त प्रस्तावों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर प्रदान की जाती है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, मानव संसाधन विकास, स्वास्थ्य संवर्धन और गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की रोकथाम के लिए जागरूकता पैदा करना, शीघ्र निदान, प्रबंधन और उपचार के लिए उपयुक्त स्वास्थ्य सुविधा केंद्र में रेफरल करना है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रबंधन (एनएचएम) के तहत और व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के एक भाग के रूप में, देश में आम गैर-संक्रामक रोगों की रोकथाम, नियंत्रण और स्क्रीनिंग के लिए एक जनसंख्या-आधारित पहल शुरू की गई है। इस पहल के अंतर्गत, 30 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को स्क्रीनिंग के लिए लक्षित किया गया है। मधुमेह सहित इन आम गैर-संक्रामक रोगों की स्क्रीनिंग आयुष्मान भारत – स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों के तहत सेवा वितरण का एक अभिन्न अंग है।
एनएचएम की निःशुल्क औषधि सेवा पहल के तहत, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए इंसुलिन सहित आवश्यक दवाओं की निःशुल्क उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकारों के सहयोग से ‘प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (पीएमबीजेपी)’ के तहत इंसुलिन सहित गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं सभी को किफायती दामों पर उपलब्ध कराई जाती हैं।
सरकारी अस्पतालों में गरीब और जरूरतमंद लोगों का इलाज या तो मुफ्त है या फिर भारी रियायती दरों पर उपलब्ध है। आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) के तहत भर्ती होकर इलाज कराने की सुविधा भी उपलब्ध है। 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) के अनुसार, इस योजना के तहत पात्र 10.74 करोड़ परिवारों को यह सुविधा प्राप्त है।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग अपने ‘क्रोनिक डिजीज प्रोग्राम’ के तहत मधुमेह सहित उच्च रोग भार वाले क्षेत्रों में केंद्रित अनुसंधान को समर्थन देता है। मधुमेह और चयापचय सिंड्रोम प्रमुख फोकस क्षेत्र रहे हैं और आणविक तंत्रों की गहन जानकारी प्राप्त करने, संबंधित रुग्णताओं को दूर करने और टाइप II मधुमेह और मधुमेह से संबंधित जटिलताओं के लिए नए दवा लक्ष्यों की खोज करने के लिए कई परियोजनाओं को समर्थन दिया गया है। मधुमेह के विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान परियोजनाओं को सरकार द्वारा सहायता प्रदान की जाती है।
