रुस से तेल ख़रीदना बंद?

By- Milind Khandekar
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले दिनों जब बार बार बयान दिया कि भारत से उनकी बात हो गई है वो रूस से तेल ख़रीदना बंद कर देंगे. भारत सरकार ने इस पर चुप्पी साध रखी थी, लेकिन अब अमेरिका ने रूस की दो बड़ी कंपनियों को ब्लैक लिस्ट कर दिया है. इसके बाद भारतीय कंपनियों के लिए रुस का तेल ख़रीदना मुश्किल हो जाएगा.
कहानी शुरू होती है 2022 में रूस और यूक्रेन युद्ध से. अमेरिका और यूरोप के देशों ने रूस पर दबाव बनाने के लिए तेल बिक्री पर शर्तें लगाई थीं जैसे रूस $60 प्रति बैरल या उससे कम रेट पर ही तेल बेचेगा ताकि उसका मुनाफा कम होगा. भारत ने इसका फ़ायदा उठाया. युद्ध से पहले भारत अपनी ज़रूरत का 5% तेल रूस से ख़रीदता था. तेल सस्ता होने के कारण भारत ने ज़्यादा तेल ख़रीदना शुरू किया. अब भारत के कुल आयात का 35% तेल रूस से आता है.
अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रंप रूस यूक्रेन युद्ध रोकना चाहते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत और चीन तेल ख़रीद कर इस युद्ध को फंड कर रहे हैं. उन्होंने भारत पर इस कारण 25% अतिरिक्त टैरिफ़ लगा दिया. 25% टैरिफ़ पहले से था. इस कारण अब भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर 50% टैरिफ़ लग रहा है. भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका में सामान बेचने में मुश्किल हो रही है. फिर भी भारत अमेरिका के दबाव में झुका नहीं और रूस से तेल खरीदता रहा.
अब अमेरिका ने रूस की दो बड़ी कंपनियों Rosneft और Lukoil को ब्लैक लिस्ट कर दिया है. यह दोनों कंपनियाँ रूस का आधा तेल उत्पादन करती हैं. भारत की सरकारी और प्राइवेट कंपनियाँ पहले तो तेल ख़रीदकर बच जाती थीं, अब मुश्किल होगी. रिलायंस इंडस्ट्रीज़ ने Rosneft से 5 लाख बैरल तेल रोज़ ख़रीदने का करार किया है. अब तेल ख़रीदने में दिक़्क़त है कि रिलायंस पर अमेरिका प्रतिबंध लगा सकता है. कोई भी कंपनी अमेरिका के फ़ाइनेंशियल सिस्टम से बाहर रहकर कारोबार नहीं कर सकती है. रिलायंस इंडस्ट्रीज़ कह चुकी है कि वो दूसरे रास्ते तलाश रहे हैं. यही बात सरकारी तेल कंपनियों पर भी लागू होती है.
भारत के लिए यह कुल मिलाकर अच्छी खबर साबित हो सकती है. रूसी तेल की ख़रीद बंद होने के बाद अमेरिका को अतिरिक्त टैरिफ़ हटाना पड़ सकता है. भारतीय बाज़ार के लिए यह अच्छी खबर होगी. सरकारी सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील जल्द हो सकती है. हालाँकि रूस से तेल नहीं ख़रीदने में एक रिस्क यह भी है कि पेट्रोल डीज़ल की क़ीमतें बढ़ सकती है. अमेरिका के फ़ैसले के बाद तेल की क़ीमतों में प्रति बैरल $5 इज़ाफ़ा हुआ है. यह और बढ़ने पर नया सिरदर्द खड़ा हो सकता है.
