सावधिकसांविधिक सुधार प्रक्रिया के माध्यम से भारत की कानूनी संरचना को विवेकपूर्ण बनाना
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मुख्य बिन्दु
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-A PIB Feature-
प्रत्येक कानूनी प्रणाली का अपना इतिहास होता है और भारत की कानून की पुस्तक भी इससे अलग नहीं है। दशकों से , इसने ऐसे कानूनों को बनाए रखा जिनकी कभी भूमिका थी लेकिन धीरे–धीरे उनकी आवश्यकता खत्म हो गई। कुछ तो 1886 में लिखे गए थे संशोधन अधिनियम ने चुपचाप उनका काम पूरा कर दिया और बिना कुछ और योगदान दिए पीछे बने रहे। चाहे बेहतर प्रौद्योगिकी, अद्यतन डाक सेवा या विवेकपूर्ण प्रक्रियाओं के माध्यम से,जैसे–जैसे शासन का आधुनिकीकरण होता है और प्रशासनिक कार्य प्रणालियां विकसित होती है, कानून की पुस्तक इन पुराने पड़ चुके कानूनों का दबाव महसूस करती है।
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क्या आप जानते हैं?
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निरसन और संशोधन अधिनियम, 2025 संचय के एक विचारशील संपादक के रूप में कार्य करता है। वह सावधानीपूर्वक उन पेजों की पहचान करता है जो अपना समय पूरा कर चुके हैं और 71 पुराने कानूनों को हटाता है। साथ ही, मुख्य कानूनों के आवश्यक हिस्सों को बेहतर बनाता है ताकि कमियों को ठीक किया जा सके और उन्हें आज की वास्तविकता के अनुरूप बनाया जा सके. एक शांत लेकिन अनिवार्य सुधार के माध्यम से यह अधिनियम–शाासन करने की सुगमता को बेहतर बनाने, व्यवसाय करने की सरलता को बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने कि भारत का कानूनी वातावरण आधुनिक अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं के अनुरूप हों–के सरकार के बड़े व्यापक लक्ष्य में मदद करता है।
एक संतुलित दृष्टिकोण: निरसन और संशोधन
निरसन और संशोधन अधिनियम पुराने कानूनों को हटाने और तकनीकी मुद्दों को ठीक करने के लिए एक सोची–समझी कोशिश करता है, जिससे सभी सेक्टर में कानूनी एकरूपता सुदृढ़ होती है। यह दो तरह का दृष्टिकोण अपनाता है: निरसनऔर संशोधन।
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क्या आप जानते हैं? 2014 के बाद से, भारत ने 1,500 से अधिक पुराने केंद्रीय कानूनों को समाप्त किया है, जिससे क़ानून की पुस्तक उल्लेखनीय रूप से हल्की और समझने में आसान हो गई है।
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इस अधिनियम की पहली अनुसूची में उन सभी कानूनों को वर्णित किया गया है जिन्हें रद्द किया जाना है और यह अधिनियम उन कानूनों को हमेशा के लिए हटा देता है जिनकी अब आवश्यकता नहीं है . इसमें वे कानून शामिल हैं जिनका उद्देश्य पूरा हो चुका है, जो बेकार हो गए हैं, या किसी और तरह से पुराने हो चुके हैं अधिनियम की दूसरी अनुसूची में सटीक बदलावों की जानकारी दी गई है और विद्यमान कानूनों में लक्षित सुधार और अपडेट किए गए हैं। इससे भाषा आधुनिक बनती है, गलतियां ठीक होती हैं और कमियां दूर होती हैं।
क़ानून की पुस्तक का सरलीकरण
व्याख्या करने के बोझ को कम करने और न्यायिक तथा प्रशासनिक दक्षता में सुधार लाने के लिए, इस अधिनियम का लक्ष्य कई कानूनों को रद्द कर एक साफ और अधिक समझने लायक कानून बनाना हैइन उपायों में 1886-2023 के समय कानून की पुस्तक से 71 अधिनियमको बदलना या हटाना शामिल है, जो अनावश्यक या पुराने हो गए हैं या बस कुछ समय के लिए उपयोगी रहे थे। एक संतुलित कानूनी रख–रखाव कोशिश अपनाकर, अनावश्यक वस्तुओं को खत्म किया गया है और मुख्य प्रावधानों में मज़बूती लाई गई है:
- जो कानून किसी दूसरे समय के हैं और जिनकी जगह आज के कानून ने ले ली है या अब जो न्यायालय पर लागू नहीं होते, उन्हें रद्द कर दिया गया है।
- इन कानूनों में अभिग्रहण/राष्ट्रीयकरण अधिनियम, संशोधन अधिनियम शामिल है, जिनमें हुए बदलावों को पहले ही मुख्य कानून में सम्मिलित कर दिया गया है। उन्हें रद्द कर दिया गया है क्योंकि उनका स्वतंत्र अस्तित्व अनावश्यक है।
लक्षित संशोधनों के माध्यम से कानूनी ढांचे को बेहतर बनाना
निरसन के अतिरिक्त, यह अधिनियम चार कार्यनीतिक संशोधन करता है जिन्हें प्रारूपण–विसंगतियों को सुधारने और मूलभूत अधिनियमों में वैधानिक संदर्भों को अद्यतन करने के लिए शामिल किया गया है।इसमें सामान्य खंड अधिनियम, 1897, सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी), 1908, भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 शामिल हैं।
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सीपीसी और सामान्य खंड अधिनियम मेंपुराने डाक संदर्भों(उदाहरणके लिए, “पंजीकृत पोस्ट” को अब “पंजीकरण और डिलीवरी के प्रमाण के साथ स्पीड पोस्ट” से बदल दिया गया है) का प्रतिस्थापन। यह वर्तमानभारतीय डाक सेवाओं के साथ संयोजन सुनिश्चित करता है और प्रक्रियागत भ्रम को दूर करता है। भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 213 को हटाना, परीक्षण आवश्यकताओं में समुदाय–आधारित असमानताओं को समाप्त करके उत्तराधिकार के मामलों में निष्पक्षता और एकरूपता बढ़ाना। आपदा प्रबंधन अधिनियम में किए गए सुधार– “रोकथाम” शब्द को “तैयारी” शब्द से बदल दिया गया है, जो यह सुनिश्चित करके वैधानिक ढांचे को मजबूत करता है कि कानून राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रचालनगत अधिदेश को सटीक रूप से दर्शाता है। |
संशोधनों के विधायी उद्देश्य
अधिनियम में किए गए बदलाव ऊपर बताए गए अधिनियमों के प्रावधानों को अपडेट करते हैं और आधिकारिक संचारके तरीकों को आधुनिक बनाने से लेकर विद्यमान प्रशासनिक तरीकों से मेल खाने के लिए भेदभाव वाले औपनिवेशिक युग के नियमों को हटाने तक, हर चीज़ को शामिल करते हैं । व्यापक रूप से, ये संशोधनउक्त कानून के तीन प्रमुख कानूनी उद्देश्यों को प्रदर्शित करते हैं:

बचत खंड: कानूनी निरसनों के बीच निरंतरता सुनिश्चित करना
अधिनियम का बचत अनुभाग 12 यह सुनिश्चित करता है कि पुराने कानूनों को हटाने से उन्हें लागू करने में कोई भ्रम या रुकावट न आए।
- निरसनों और संशोधनों के बावजूद, पहले के काम, विद्यमान अधिकार और वर्तमान कानूनी प्रक्रिया अप्रभावित बनी रहती है।
- दूसरे कानून पहले की तरह ही काम करते रहेंगे और रद्द किए गए कानून वापस नहीं लाए जाएंगे।
- यह निरसन कानून के किसी भी विद्यमान नियम, न्यायालय के अधिकार क्षेत्र, कानूनी प्रक्रिया, पारंपरिक कार्यप्रणाली, विशेषाधिकार, छूट, कार्यालय या नियुक्ति जो वर्तमान में लागू है कोई बदलाव नहीं करेगा, भले ही वह रद्द किए गए कानून से ही क्यों न आया हो।
कुल मिलाकर, यह कानून में सुधार करते हुए स्थिरता और निरंतरता बनाए रखने में मदद करता है।
निष्कर्ष
निरसन और संशोधन अधिनियम, 2025व्यवस्था कोविवेकपूर्ण बनाने के लिए सहज तरीके से लाया गया। इसने धीरे से उन कानूनों को हटा दिया जोअब वे आवश्यक नहीं थे, अनावश्यक प्रावधनों को कम किया और उन प्रावधानों को बेहतर बनाया जो अभी भी महत्वपूर्ण थे। ऐसा करके, इसमें उन चीजों को स्पष्ट किया जहां पहले भ्रम था और व्याख्या संबंधी जटिलता की जगह स्पष्टता स्थापित की। पुराने संदर्भों को अपडेट किया गया है, अनसुलझे हिस्सों को सुलझाया गया है और यह सांविधिक पुस्तक एक ऐतिहासिक पुरालेख के बजाय एक जीवंत दस्तावेज़ की तरह पढ़ी जाने लगी है।
