महिलाओं की हत्याओं के मामलों में लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई, तीन उपनिरीक्षक निलंबित
देहरादून, 3 फरबरी। पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड दीपम सेठ की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय अपराध एवं कानून व्यवस्था समीक्षा बैठक में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों, गोलीबारी की घटनाओं और भूमि धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में सख्त निर्णय लिए गए। बैठक के दौरान लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई और जांच प्रक्रिया को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में लिए गए निर्णयों के तहत देहरादून जिले के ऋषिकेश क्षेत्र में एक महिला की गोली मारकर हत्या किए जाने के मामले में लापरवाही पाए जाने पर एम्स चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक साहिल वशिष्ट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसी तरह, कोतवाली नगर देहरादून क्षेत्र में युवती के जघन्य हत्याकांड में प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने पर खुड़बुड़ा चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक प्रद्युम्न नेगी को भी निलंबित किया गया है। दोनों मामलों की जांच पुलिस अधीक्षक अपराध, देहरादून श्रीमती विशाखा अशोक भदाणे को सौंपी गई है। साथ ही इन घटनाओं में अन्य पुलिस कर्मियों की भूमिका की जांच कर सात दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
हरिद्वार जिले के भगवानपुर थाना क्षेत्र में रविदास जयंती के दौरान दो पक्षों के बीच हुए संघर्ष और गोलीबारी की घटना में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर हल्का प्रभारी चुड़ियाला उपनिरीक्षक सूरत शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। इस पूरे मामले की जांच पुलिस अधीक्षक अपराध, हरिद्वार जितेन्द्र मेहरा को सौंपी गई है। इसके साथ ही घटना में अन्य पुलिस कर्मियों की भूमिका की जांच कर सात दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में ऊधमसिंहनगर जिले के सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण में भूमि विवाद से जुड़े आरोपों पर भी चर्चा की गई। इस संबंध में भूमि धोखाधड़ी (लैंड फ्रॉड) के मामलों में निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे मामलों में अनिवार्य रूप से क्षेत्राधिकारी स्तर पर समयबद्ध जांच कराई जाएगी। जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि मामला सिविल प्रकृति का है अथवा आपराधिक, जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लंबित भूमि संबंधी मामलों की पुलिस मुख्यालय स्तर से नियमित निगरानी की जाएगी।
इसके अलावा बैठक में भ्रष्टाचार के मामलों पर भी सख्त रुख अपनाने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सतर्कता विभाग को भ्रष्ट आचरण में लिप्त पुलिस कर्मियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई में तेजी लाने को कहा गया है।
