Front Page

आवारा कुत्तों के हमलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा– मौत या गंभीर चोट पर राज्य सरकार देगी भारी मुआवजा

 

नई दिल्ली, 14 जनवरी। देश में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा है कि यदि आवारा कुत्तों के काटने से किसी व्यक्ति की मौत होती है या वह गंभीर रूप से घायल होता है, तो इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार और स्थानीय निकायों की होगी, और ऐसे मामलों में भारी मुआवजा देना पड़ेगा।
न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह केवल पशु अधिकारों का नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और जीवन के अधिकार का मामला है। अदालत ने टिप्पणी की कि कई राज्यों और नगर निकायों द्वारा एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों को सही ढंग से लागू नहीं किया गया, जिसके चलते आवारा कुत्तों की संख्या और हमलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने डॉग लवर्स और सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने वालों पर भी तीखी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति कुत्तों की देखभाल करना चाहता है, तो उसे उन्हें अपने घर में रखना चाहिए, न कि सड़कों पर छोड़कर आम लोगों की जान जोखिम में डालनी चाहिए। कोर्ट ने सवाल उठाया कि सड़क पर कुत्तों को खाना खिलाने से उनकी आक्रामकता और क्षेत्रीय व्यवहार (territorial aggression) बढ़ता है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों पर हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं
अदालत ने राज्यों से पूछा कि आवारा कुत्तों के काटने से होने वाली मौतों और गंभीर चोटों का जिम्मेदार कौन होगा, और क्या सरकारें केवल दिशानिर्देश जारी कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि यदि प्रशासन अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने में विफल रहता है, तो अदालत राज्य सरकारों पर आर्थिक दंड और मुआवजा लगाने से पीछे नहीं हटेगी
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह जानवरों के प्रति क्रूरता के पक्ष में नहीं है, लेकिन मानव जीवन सर्वोपरि है। आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और नियंत्रित पुनर्वास जैसी व्यवस्थाओं को कागजों तक सीमित रखने के बजाय जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करना होगा।
मामले की अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकारों और नगर निकायों से ठोस कार्ययोजना और अनुपालन रिपोर्ट तलब कर सकता है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो भविष्य में और भी सख्त आदेश जारी किए जा सकते हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!