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विजन 2047 के लिए ‘टीम उत्तराखंड’ की जरूरत, प्रशासन निभाए निर्णायक भूमिका: मुख्यमंत्री धामी

देहरादून, 23 जनवरी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प तभी साकार होगा, जब देश का प्रत्येक राज्य समान रूप से विकसित होगा। इसके लिए उत्तराखंड को अपनी संसाधन क्षमता, भौगोलिक परिस्थितियों और विशिष्टताओं के अनुरूप दीर्घकालिक विकास की स्पष्ट दिशा तय करनी होगी।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट में आयोजित चिन्तन शिविर एवं ‘डॉयलाग ऑन विजन 2047’ कार्यक्रम में राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति निर्माण से लेकर क्रियान्वयन और अंतिम सफलता तक प्रशासनिक तंत्र की सक्रियता, संवेदनशीलता और दक्षता सबसे अहम भूमिका निभाती है। अधिकारियों को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि कार्य केवल आदेश जारी करने या बैठकों तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचार, पारदर्शिता, समयबद्धता और परिणाम-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ योजनाओं को धरातल पर उतारा जाए।

उन्होंने कहा कि विकसित उत्तराखंड से विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए यह जरूरी है कि योजनाओं और नीतियों का सीधा असर आम नागरिकों के जीवन पर दिखे। किसानों की आय में वृद्धि, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, महिलाओं को समान अधिकार और अवसर—यही विकसित राज्य की वास्तविक कसौटी होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय राज्य होने के कारण उत्तराखंड के सामने कई चुनौतियाँ हैं, लेकिन इन्हीं चुनौतियों में अपार संभावनाएँ भी छिपी हैं। यदि राज्य की नीतियों को स्थानीय आवश्यकताओं, भौगोलिक परिस्थितियों और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढाला जाए, तो उत्तराखंड इकोनॉमी और इकोलॉजी के बीच संतुलन बनाकर देश को विकास की नई दिशा दे सकता है।

उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि विभागीय सीमाओं से ऊपर उठकर आगामी 25 वर्षों की स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की जाए और “सोलो प्लेयर” की मानसिकता छोड़कर “टीम उत्तराखंड” के रूप में कार्य किया जाए। साथ ही अपने सेवा क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान देने और ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम के दौरान सामने आने वाली समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित उत्तराखंड की नींव तीन स्तंभों—सुशासन, तकनीक एवं नवाचार, और जन-केंद्रित सतत व संतुलित विकास—पर टिकी है। उन्होंने ई-गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों के व्यापक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि तकनीक की पहुंच दूरस्थ और सीमांत गांवों तक सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक योजना का स्पष्ट आउटपुट और आउटकम तय किया जाए। केवल धन व्यय हो जाना किसी योजना की सफलता नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के निर्णय न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य की दिशा भी तय करते हैं और जनता का विश्वास ही प्रशासन की सबसे बड़ी पूंजी है।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के बाद भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चिन्तन शिविर में काफी देर तक मौजूद रहे। वे मंच के नीचे बैठकर विभिन्न विषयों पर चल रहे मंथन और संवाद को सुनते रहे तथा प्रमुख सुझावों और बिंदुओं को स्वयं नोट करते रहे।

इस अवसर पर सेतु आयोग के सीईओ शत्रुघ्न सिंह, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, नीति आयोग से प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. नीलम पटेल, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तथा विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ उपस्थित थे।

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