केंद्र सरकार ने सेना की रिटायर्ड नर्सों को भी पूर्व सैनिक माना
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पूर्व सैनिकों के हित में एक अहम फैसला लेते हुए पूर्व सैनिक (केंद्रीय सिविल सेवा एवं पदों से संबंधित पुनर्रोजगार) संशोधन नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। इस फैसले से अब सैन्य नर्सिंग सेवा (एमएनएस) में सेवा दे चुके कर्मियों को भी आधिकारिक रूप से पूर्व सैनिक माना जाएगा और उन्हें सरकारी नौकरियों में वही सुविधाएं मिलेंगी, जो सेना, नौसेना और वायु सेना के अन्य पूर्व सैनिकों को मिलती हैं।
अब तक यह स्पष्ट नहीं था कि एमएनएस अधिकारी, जो कमीशन प्राप्त अधिकारी होते हैं, पूर्व सैनिकों के पुनर्रोजगार से जुड़े लाभों के हकदार हैं या नहीं। नए संशोधन के बाद यह भ्रम पूरी तरह दूर हो गया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि एमएनएस में किसी भी रैंक पर, चाहे योद्धा हों या गैर-योद्धा, सेवा दे चुके सभी कर्मी पूर्व सैनिक की श्रेणी में आएंगे।
क्या होंगे सीधे फायदे?
इस संशोधन के लागू होने के बाद एमएनएस के पूर्व कर्मियों को सरकारी नौकरियों में कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे—
आरक्षण का लाभ:
केंद्र सरकार की
समूह ‘सी’ नौकरियों में 10 प्रतिशत
समूह ‘डी’ नौकरियों में 20 प्रतिशत आरक्षण
आयु सीमा में छूट:
सिविल नौकरी के लिए आवेदन करते समय उम्मीदवार की वास्तविक आयु में से उसकी सैन्य सेवा की अवधि और अतिरिक्त 3 वर्ष घटाए जाएंगे।
नौकरी में प्राथमिकता:
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की भर्तियों में एमएनएस के पूर्व कर्मियों को अन्य पूर्व सैनिकों के समान प्राथमिकता मिलेगी।
कब से लागू हुआ नियम?
यह संशोधन 9 फरवरी 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। यानी अब से होने वाली भर्तियों में एमएनएस के पूर्व कर्मी इन सभी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।
क्यों है यह फैसला खास?
यह फैसला उन सैन्य नर्सों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में देश की सेवा की, लेकिन सेवा निवृत्ति के बाद उन्हें पुनर्रोजगार के मामले में स्पष्ट नियमों का अभाव झेलना पड़ता था। सरकार के इस कदम से अब पूर्व सैन्य नर्सों के पुनर्वास और दूसरे करियर के अवसर मजबूत होंगे।
कुल मिलाकर, यह निर्णय न केवल पूर्व सैनिकों के सम्मान को और सुदृढ़ करता है, बल्कि देश सेवा के बाद उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
