एंटीबायोटिक प्रतिरोध के खिलाफ जंग: उन्नत निदान रणनीतियों पर जोर, फैकल्टी को व्यावहारिक प्रशिक्षण
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज के मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी विभाग में प्रशिक्षण एवम् विकास सेल नीति के अंतर्गत वॉर अगेन्स्ट रेसिस्टेंसः माइक्रोबियल थ्रेट्स एंड जीनोमिक प्रोफाइलिंग पर फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम- एफडीपी
मुरादाबाद, 05 जनवरी .तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज के मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी विभाग में ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट सेल के तहत आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) एवं वर्कशॉप में मुख्य अतिथि प्रो. पथु उषा किरण ने एंटीबायोटिक प्रतिरोध को गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य संकट बताते हुए उन्नत निदान रणनीतियों पर जोर दिया।
टीएमयू मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर में बायोकेमिस्ट्री की एचओडी प्रो. पथु उषा किरण ने कहा कि एंटीबायोटिक प्रतिरोध विश्व स्तर पर लाखों मौतों का कारण बन रहा है। इस खतरे से लड़ने के लिए तेज एवं सटीक आणविक परीक्षण विधियों की आवश्यकता है। उन्होंने शोधकर्ताओं, चिकित्सकों एवं नीति-निर्माताओं के सहयोगात्मक प्रयासों की पुरजोर वकालत की। कार्यक्रम का विषय था- ‘वॉर अगेन्स्ट रेसिस्टेंस: माइक्रोबियल थ्रेट्स एंड जीनोमिक प्रोफाइलिंग’।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. किरण, सीटीएलडी निदेशक प्रो. पंकज कुमार सिंह, कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल के प्रधानाचार्य प्रो. नवनीत कुमार एवं एमएलटी विभागाध्यक्षा प्रो. रुचि कांत आदि द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। सभी प्रतिभागियों को ई-सर्टिफिकेट प्रदान किए गए।
वर्कशॉप में प्रतिभागियों को एसेप्टिक सैंपल हैंडलिंग, न्यूट्रिएंट एगर, ब्लड एगर एवं मैककॉन्की एगर पर कल्चर तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। ग्राम स्टेनिंग से बैक्टीरिया की पहचान सिखाई गई।
प्रतिभागियों ने कैटालेज, ऑक्सीडेज, इंडोल, यूरिएज एवं ट्रिपल शुगर आयरन (टीएसआई) जैसे जैव रासायनिक परीक्षण कर बैक्टीरियल आइसोलेट की सही पहचान सीखी। क्लिनिकल एंड लैबोरेटरी स्टैंडर्ड्स इंस्टीट्यूट (सीएलएसआई) दिशानिर्देशों के अनुसार किर्बी-बाउर डिस्क डिफ्यूजन विधि से एंटीबायोटिक संवेदनशीलता परीक्षण का प्रशिक्षण भी दिया गया।
दूसरे सत्र में आणविक निदान तकनीकों पर फोकस रहा, जिसमें बैक्टीरियल सेल लाइसिस, रासायनिक एवं अल्कोहल-आधारित डीएनए निष्कर्षण, एगरोज जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस एवं यूवी लाइट के तहत डीएनए बैंड्स का अवलोकन शामिल था। इन तकनीकों से प्रतिभागियों को जीनोमिक पैटर्न व्याख्या के महत्वपूर्ण कौशल प्राप्त हुए, जो नैदानिक निर्णय एवं संक्रमण नियंत्रण में सहायक हैं।
तकनीकी सत्रों का संचालन डॉ. शिव शरण सिंह, सुश्री विवेचना, डॉ. वर्षा राजपूत, सुश्री साक्षी बिष्ट एवं सुश्री शिखा पालीवाल ने किया। कार्यक्रम में श्री अमित बिष्ट, श्री रवि कुमार, श्री राकेश कुमार यादव, श्री शिवम अग्रवाल, श्री बैजनाथ दास, श्रीमती अर्चना जैन एवं सुश्री अदिति त्यागी आदि उपस्थित रहे।




