देवाल कौथीग की पहली शाम लोक गायक गजेंद्र राणा और टीम के नाम रही
-हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली/देवाल, 16 फरबरी। कुमाऊं एवं गढ़वाल मंडलों के मध्यस्थल देवाल के प्रसिद्ध कौथिग के दूसरे दिन के कार्यक्रम का थराली विधायक भूपाल राम टम्टा ने बतौर मुख्य अतिथि रीबन काट कर दीप प्रज्वलित कर किया। तीन दिवसीय मेले की प्रथम सांस्कृतिक संध्या प्रसिद्ध गायक गजेंद्र राणा के टीन के नाम रहा है।
सोमवार को शुरू हुए तीन दिवसीय देवाल कौथिग की द्वितीय दिवस का उद्घाटन मंगलवार को थराली विधायक भूपाल राम टम्टा ने किया।इस मौके पर विधायक ने कहा कि दशकों से देवाल कौथिग का आयोजन किया जाता रहा है एक तरह से देवाल कौथिग गढ़वाल व कुमाऊं के बीच प्रसिद्ध रहा हैं। उन्होंने मेले के विकास के लिए हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया।इस मौके पर विधायक ने केंद्र एवं राज्य सरकार के द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी। इसके अलावा उन्होंने थराली विधानसभा क्षेत्र में जारी विकास कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि राजजात मार्ग थराली-देवाल-मंदोली-वांण एवं ग्वालदम-नंदकेशरी मोटर सड़कों के कायाकल्प के प्रयास जारी हैं। विधायक ने देवाल कौथिग के लिए अपनी ओर से 1 एवं प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत की ओर से 1 लाख रुपए कुल 2 लाख रुपए दिए जाने की घोषणा की। इस मौके पर देवाल प्रमुख तेजपाल रावत ने देवाल कौथिग पर प्रकाश डालते हुए इसके विकास के लिए लगातार प्रयास जारी रखने की बात कही।

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तीन दिवसीय मेले के दूसरे दिन डीएवी कॉलेज देहरादून के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष दयाल बिष्ट, भाजपा मंडल अध्यक्ष देवाल उमेश मिश्रा, महामंत्री नरेंद्र बागड़ी,कुलसारी मंडल अध्यक्ष गिरीश चमोला, महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष नीमा कोटेड़ी, जेष्ठ प्रमुख दीपक गड़िया, चोटिग के क्षेत्र पंचायत सदस्य रमेश गड़िया,सवाड़ की प्रधान आशा धपोला, ल्वाणी की मीना देवी, फल्दियागांव के प्रेम परिहार,कोटेड़ा की चमेली देवी,मोपाटा के रूप सिंह कुंवर,कांग्रेसी नेता इंद्र सिंह राणा, महावीर बिष्ट, कंचन बिष्ट,विधायक प्रतिनिधि सुरेंद्र बिष्ट, गणेश मिश्रा, पुष्कर सिंह बिष्ट, अनिल देवराड़ी आदि बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे।
इस अवसर पर मेला कमेटी अध्यक्ष लखन रावत,संरक्षक नरेंद्र बिष्ट,कविता मिश्रा,उमेश मिश्रा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष कमल गड़िया, उपाध्यक्ष लखपत परिहार, महामंत्री संदीप बिष्ट, कोषाध्यक्ष भजन सिंह,सचिव जितेंद्र बिष्ट,सह सचिव विनायक मिश्रा,संचालक युवराज बसेड़ा,चंद्र शेखर मिश्रा,विशाल परिहार आदि ने अतिथियों का स्वागत किया।इस मौके पर अध्यक्ष लखन रावत ने कहा कि पिछले कई वर्षों से जनसहयोग के बल पर मेले का आयोजन किया जा रहा है। और सहयोग से उत्तरोत्तर मेला विकसित होता जा रहा है। उन्होंने विधायक सहित अन्य अतिथियों को मेले के विकास के लिए सहयोग की अपेक्षा जताईं।इस मौके पर देवाल क्षेत्र की महिला मंगल दलों, स्कूल, कालेजों के छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों को घंटों बांधें रखा।
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देवाल कौथिग की प्रथम सांस्कृतिक संध्या उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक गायक गजेंद्र राणा, गायिका पूनम सती,लीला पयाल, गणेश कांडपाल के साथ ही बागनाथ लोक कला संस्कृति मंच बागेश्वर व देवभूमि लोक कला मंच देहरादून के कलाकारों के नाम रही। इस दौरान तमाम लोक गीतों में उपस्थित जनसमुदाय जमकर थिरका। सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन देवाल प्रमुख तेजपाल रावत एवं देवाल ब्लाक के गुवीला गांव निवासी देहरादून के सफल युवा व्यवसाई नरेंद्र बिष्ट ने रीबन काट एवं दीप प्रज्वलित कर किया।
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आज से करीब तीन दशक पूर्व गढ़वाल की पिंडर घाटी एवं कुमाऊं की कत्यूर घाटी के बीच महाशिवरात्रि के पर्व पर आयोजित होने वाले देवाल कौथिग का एक अलग ही महत्व रहा हैं। देवाल कौथिग का आयोजन कब से शुरूआत हुई इस सम्बंध में कोई पुख्ता दस्तावेज तों नही हैं, किंतु माना जाता हैं कि स्वस्फूर्त देवाल कौथिग का आयोजन एक शताब्दी से पहले से आयोजित होता आ रहा है। बताया जाता हैं कि सड़कों के अभाव में दोनों ही मंडलों में निवास करने वाली ध्याणी, बेटियां बढ़, चढ़ कर इस कौथिग में शिरकत करते थे। उस दौर में पिंडर घाटी में देवाल एवं कत्यूर घाटी में कोट मेला ही मुख्य मेला होता था बदलते दौर में हालांकि अब महाशिवरात्रि के पर्व पर ही पिंडर घाटी में ही आधे दर्जन से अधिक स्थानों पर महाशिवरात्रि के पर्व पर मेले का आयोजन हो रहा है, बावजूद इसके आज भी देवाल कौथिग का अपना महत्व कायम है। बदलते दौर में देवाल कौथिग का स्वरूप भी बदला है,2009 के बाद देवाल कौथिग को एक मंच प्रदान किया गया और इस मंच के माध्यम से गढ़, कुमाऊं की लोक संस्कृति का प्रचार प्रसार किया जा रहा है।
