पुतिन की भारत यात्रा : बात छोटी भी और गंभीर भी है

-गोविंद प्रसाद बहुगुणा-
होस्ट (मेजबान) जहां जहां अतिथि को ले जाना चाहेगा अतिथि वहीं तो जायेगा। सुना है कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन जो इस समय राजकीय यात्रा पर भारत पधारे हैं, शायद नेहरू जी और इन्दिरा गांधी की समाधि पर भी अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करना चाहते थे क्योंकि ये दोनों पूर्व प्रधानमंत्री सोवियत संघ के पहले घनिष्ठ पारंपरिक मित्र रहे हैं लेकिन उनका रोड मैप राज घाट तक ही सीमित रखा गया है। विगत में जब चीन के अतिथि आये थे तो उन्हें महाबली पुरम भी घुमाने ले गए और झूला भी झुलाए थे। इसी तरह विगत वर्षों में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सम्मान में *नमस्ते ट्रम्प * नाम से एक विशेष स्वागत कार्यक्रम सरदार पटेल स्टेडियम अहमदाबाद( गुजरात) में आयोजित किया गया था। …
. राजनीतिक विश्लेषक इस बात को नोट करते ही हैं लेकिन विदेशी अतिथि भी नोट करते ही होंगे…खैर हम उम्मीद करते हैं कि पुतिन महाशय की यह यात्रा दोनों देशों की मैत्री दृढ़ करेगी और दोनों देशों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी।
प्रोटोकॉल का उल्लंघन करना लोकतान्त्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन माना जा सकता है , सदन में जिसको विपक्षी दलों के नेता की मान्यता संसद ने विधिवत दी है, उसको विशिष्ट अतिथि से न मिलवाना साबित करता है कि
आपने अपनी घरेलू स्थिति की पोल खोल दी विदेशी मेहमान के सामने, इस हरकत से आपने खुद ही अपना कद छोटा कर दिया मेहमान के सामने
