उत्तराखंड में रोप-वे क्रांति की तेज रफ्तार: केदारनाथ-हेमकुंट पहुंचना अब होगा आसान!
देहरादून, 12 दिसंबर। उत्तराखंड के पहाड़ों में अब जल्द ही हवा में उड़ते रोप-वे तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा सहारा बनने वाले हैं। मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में रोप-वे विकास को गति देने के कई ठोस और दूरगामी निर्णय लिए गए।
मुख्य निर्णय एक नजर में:
- इस महीने के अंत तक रोप-वे विकास बोर्ड की पहली बैठक अनिवार्य
- सभी नए रोप-वे प्रोजेक्ट्स के लिए बोर्ड से अनुमति लेना जरूरी, डुप्लीकेशन पर पूर्ण रोक
- 50 प्रस्तावित रोप-वे में से 6 को मिली तुरंत हरी झंडी
- केदारनाथ और हेमकुंट साहिब रोप-वे का काम शुरू, ठेका आवंटित
- काठगोदाम-हनुमानगढ़ी (नैनीताल) प्रोजेक्ट में अब कैंचीधाम भी जुड़ेगा
- अगले 5-10 साल में नए पर्यटक स्थलों और सड़कों का पूरा रोडमैप तैयार करने के निर्देश
मुख्य सचिव ने साफ कहा, “शुरुआत में सिर्फ इन 6 प्राथमिकता वाले प्रोजेक्ट्स पर पूरा फोकस रहेगा। केदारनाथ और हेमकुंट रोप-वे की हर स्टेज के लिए समयबद्ध टाइमलाइन और PERT चार्ट एक सप्ताह में तैयार हो।”
खास ध्यान इन बातों पर:
- वन एवं वन्यजीव क्लियरेंस में तेजी लाई जाए
- हैवी मशीनरी ले जाने के लिए सड़कों के टर्निंग रेडियस बढ़ाए जाएं, पुल मजबूत किए जाएं
- कैंचीधाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए वहां अलग रोप-वे की संभावना तलाशी जाए
बैठक में बताया गया कि कनकचौरी-कार्तिक स्वामी, रैथल-बरनाला और जोशीमठ-औली-गौरसों रोप-वे की DPR तेजी से तैयार हो रही है।
मुख्य सचिव ने जोर देते हुए कहा, “रोप-वे सिर्फ यातायात का साधन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और तीर्थ-पर्यटन का नया इंजन होंगे। हमें अभी से अगले दशक का पूरा खाका तैयार करना है।”
इस बैठक में सचिव पर्यटन श्री दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, धीराज सिंह गर्ब्याल, अपर सचिव अभिषेक रूहेला और NHLML के प्रशांत जैन सहित सभी संबंधित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
केदारनाथ, बद्रीनाथ, हेमकुंट साहिब और चारधाम यात्रा अब बुजुर्गों और बच्चों के लिए भी आसान होने वाली है। उत्तराखंड सरकार की इस महत्वाकांक्षी रोप-वे योजना से पहाड़ का विकास नई ऊंचाइयों को छूने जा रहा है!

