गढ़वाल विश्वविद्यालय में हुआ गणित, ज्योतिष और रसायनशास्त्र जैसे विषयों पर गहन विमर्श

श्रीनगर (गढ़वाल), 18 फरवरी। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में “पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परम्परा का एकीकरण” विषय पर आयोजित छह दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम के तीसरे दिन गणित, ज्योतिष और रसायनशास्त्र जैसे विषयों पर गहन विमर्श किया गया।
मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक प्रो. डी.एस. नेगी ने अतिथि वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए भारतीय ज्ञान परम्परा की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्कृत वर्णमाला की संरचना अपने आप में एक वैज्ञानिक दृष्टि को समेटे हुए है। प्रो. नेगी ने उल्लेख किया कि प्रसिद्ध रसायनशास्त्री मेंडलीफ द्वारा आवर्त सारणी के वर्गीकरण के दौरान आई चुनौतियों के समाधान के संदर्भ में संस्कृत वर्णमाला की वैज्ञानिक संरचना से प्रेरणा लेने की चर्चा विद्वानों के बीच होती रही है, जो भारतीय भाषिक परम्परा की वैज्ञानिकता को रेखांकित करती है।
कार्यक्रम के सत्रों को हिमाचल केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ. जितेंद्र कुमार तथा ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के डॉ. अंकुश शर्मा ने संबोधित किया और विषय के विभिन्न आयामों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस अवसर पर यूजीसी पर्यवेक्षक प्रो. आर.एल. नारायण सिम्हा, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अमरजीत परिहार, डॉ. पुनीत वालिया सहित अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मुस्कान कपूर एवं डॉ. अमिल कुमार ने किया।
