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नैनीडांडा में बहेगी विकास की बयार – रोड मैप तैयार

पौड़ी की जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया ने जिले के अति दूरस्थ क्षेत्र नैनीडांडा में जगाई विकास की अलख : पर्यटन, मत्स्यपालन व स्वरोजगार पर किया फोकस

-महिपाल गुसाईं-

मुख्यालय चाहे ब्लॉक का हो या जिले का, वहां का विकास एक स्वाभाविक प्रक्रिया है लेकिन दूरस्थ क्षेत्र अकसर विकास की अपेक्षाओं से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में अगर किसी दूरस्थ क्षेत्र में कोई बड़ा अधिकारी नई पहल करता है तो लोगों की न सिर्फ निराशा दूर होती है बल्कि उत्साह का संचार भी होता है। पौड़ी जनपद के अति दूरस्थ नैनीडांडा प्रखंड में पहली बार किसी जिलाधिकारी के पहुंचने से क्षेत्र में विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद जगी है और यह जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया के नैनीडांडा क्षेत्र का भ्रमण से हुआ है।
आमतौर पर होता यह है कि जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों तक ही विकास योजनाएं सिमट जाती हैं। दूरस्थ क्षेत्रों तक या तो सूचना का प्रसार नहीं हो पाता या फिर तब तक योजनाओं की मियाद गुजर जाती है। इस लिहाज से डीएम स्वाति भदौरिया ने दूरस्थ क्षेत्रों पर फोकस कर अपनी प्राथमिकता परिभाषित की है।

उन्होंने नैनीडांडा प्रखंड में मत्स्य पालन, पर्यटन एवं स्वरोजगार से जुड़े विभिन्न विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करते हुए ग्राम पंचायत ओलेथ के ग्राम ब्यूरा में मत्स्य उत्पादों के लिए कलेक्शन सेंटर स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने पर्यटकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए मत्स्य आउटलेट खोलने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी। इसके लिए जरूरत पड़ने पर धनराशि उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया।

प्रखंड के किसान गोपाल सिंह रावत ने अपने मत्स्य तालाब का अवलोकन कराते हुए क्षेत्र की समस्याओं से जिलाधिकारी को अवगत कराया। इस दौरान ग्रामीण महिलाओं ने जंगली जानवरों की समस्या, पेयजल, बिजली पोल और पाइपलाइन से जुड़ी परेशानियां रखीं, जिस पर जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने लैंटाना घास से हो रही समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए इसके नियंत्रित संग्रह एवं उपयोग के लिए कलेक्शन सेंटर स्थापित करने की घोषणा की, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल सकेगा।

खंड विकास अधिकारी प्रमोद चंद्र पांडेय के मुताबिक मनरेगा एवं मत्स्य विभाग के अभिसरण से इस वित्तीय वर्ष में दो मत्स्य इकाइयों का निर्माण किया गया है, जिनकी कुल लागत लगभग 4.5 लाख रुपये है। इन इकाइयों का संचालन स्वयं सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने कहा कि नैनीडांडा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में पर्यटन, स्वरोजगार और ग्रामीण अधोसंरचना को बढ़ावा देना प्रशासन की प्राथमिकता है। इन प्रयासों से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को रोजगार से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इस तरह का नवाचार स्वाति भदौरिया चमोली में भी कर चुकी हैं।

कुल मिलाकर पहली बार किसी जिलाधिकारी ने इस उपेक्षित से क्षेत्र का रुख कर सरकार की योजनाओं का रुख दूरस्थ क्षेत्रों की तरफ किया है। इससे लोगों में भी उम्मीद जगी है कि देर से ही सही विकास की बयार उनके यहां भी बहेगी।

चमोली में नवाचार से आई थी चर्चा में

चमौली में डीएम रहते हुए डीएम स्वाति भदौरिया ने अपने बेटे को आंगनबाड़ी केंद्र में प्रवेश दिलाया तो एक नए अध्याय का सूत्रपात हुआ था। उनका मानना था कि जब सरकार तमाम सुविधा दे रही है तो बच्चे को महंगे स्कूल में भेजने की क्या जरूरत है? इससे समाज में एक अच्छा संदेश गया। वे हर किसी को मदद करने की कोशिश में रहती हैं। अपने सरकारी आवास पर कार्यरत एक नौजवान को राज्य स्तर का गायक बनने का अवसर देकर भी वे देशभर में चर्चित रही हैं ।

सर्वविदित है कि श्रीमती भदौरिया ने चमोली में अपने कार्यकाल के दौरान जरूरतमंदों और आम लोगों के लिए कई अहम प्रोजेक्ट शुरू किए थे। ये प्रोजेक्ट्स थे- बचपन (बच्चों की प्रगति और पोषण के लिए बेहतर आंगनबाड़ी)। उन्होंने पंच बद्री प्रसादम परियोजना की भी शुरुआत करवायी जिसके तहत वहां के लोग तुलसी, स्थानीय जड़ी-बूटियों की धूप, अखरोट, चौलाई के लड्डू, सरस्वती और अलकनंदा के जल से स्थानीय लोगों की।

इसके अलावा स्वाति एस. भदौरिया ने राजकीय इंटर कॉलेजों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत करवायी। आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए प्रेरणा नि:शुल्क कोचिंग क्लास भी उनकी पहल का ही नतीजा है। स्थानीय उपज को बढ़ावा देने के लिए संडे बाजार और बागवानी आउटलेट का विकास उनकी नवाचारी सोच का अहम हिस्सा रहा है।

यही नहीं जिले में एंडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा, नये पर्यटन स्थलों का विकास भी उनकी दूरदर्शी सोच को दर्शाता है। फेम इंडिया और एशिया पोस्ट द्वारा शानदार गवर्नेंस, दूरदर्शिता, उत्कृष्ट सोच, जवाबदेह कार्यशैली, अहम फैसले लेने की त्वरित क्षमता, गंभीरता और व्यवहार कुशलता आदि दस मानदंडों पर किये गए सर्वे में चमोली की जिलाधिकारी रहते स्वाति एस भदौरिया “उम्दा” श्रेणी में रही हैं। उनके दृष्टिकोण को देखते हुए अब पौड़ी जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में भी कुछ नया दिखने की उम्मीद स्वाभाविक है।

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