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तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के आर्थो विभाग की ओर से दो दिनी यूपीओए पीजीआईसीएल वर्कशॉप का श्रीगणेश

-प्रो0 श्याम  सुन्दर भाटिया –
मुरादाबाद, 15  सितम्बर। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के आर्थो विभाग की ओर से दो दिनी यूपीओए पीजीआईसीएल वर्कशॉप में आर्थो की बारीकियां समझाई गईं। वर्कशॉप के पहले दिन यूपी के जाने – माने हड्डी रोग विशेषज्ञों ने अपने विपुल भंडार से अपने अनुभवों को साझा किया। वर्कशॉप का शुभारंभ टीएमयू के वीसी प्रो. रघुवीर सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि ऑडिटोरियम में मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इस मौके पर यूपीओए के प्रेसिडेंट डॉ. आशीष कुमार,मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रो. वीके गौतम,मुरादाबाद के आर्थो क्लब के अध्यक्ष डॉ. दीपक रस्तोगी, डॉ. एसके जैन, डॉ. अमित सराफ, डॉ.मनमोहन शर्मा, डॉ. संदीप विश्नोई आदि की गरिमामयी मौजूदगी रही, जबकि रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा , एसोसिएट डीन प्रो. मंजुला की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही। इससे पूर्व मेहमानों का बुके देकर वेलकम किया गया। वर्कशॉप का संचालन डॉ.शिवम मदन ने किया। उद्घाटन संबोधन में वीसी प्रो. सिंह ने गुरु – शिष्य का रिश्ता लोहार – लोहे की मानिंद बताते हुए कहा, रेजिडेंट जाने – माने आर्थोपेडिक्स के अनुभवों से अपने को तराशें। इस अनुभवों से ही वे असल जिंदगी में मरीजों के चेहरे पर मुस्कान ला पाएंगे।


एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा के प्रोफेसर एण्ड हेड डॉ. सीपी पाल ने कूल्हे के परीक्षण पर बोलते हुए कहा, डॉक्टर को नियम और परीक्षण करते वक्त मरीज का शरीर खुला होना चाहिए। साथ ही बोले, उम्र के मुताबिक कूल्हे की दुश्वारियां होती हैं,जबकि कुछ मरीजों को जन्म जात होती है। वीडियो के जरिए परीक्षण के तौर – तरीके पर विस्तार से प्रकाश डाला। दूसरी ओर एमएस की फाइनल परीक्षा में शामिल होने जा रहे स्टुडेंट्स को सलाह दी,परीक्षा के दौरान छात्रों को न केवल अपना केस प्रभावी तरीके से प्रेजेंट सकें,बल्कि परीक्षा में अच्छे अंक भी लाएं।

हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सांइस के एचओडी डॉ. संदीप कुमार ने नी एग्जामिन के तौर-तरीकों को एक युवक पर प्रेक्टिकल करके दिखाया। घुटने के परीक्षण के दौरान किसी भी मरीज को आधा दर्जन से अधिक जॉँचों से गुजरना पड़ता है। युवक को टेबिल पर लिटाकर जाँचों के तौर तरीके बताए गए। बीच-बीच में ओडी में मौजूद रेजिडेंट डॉक्टरों को भी बुलाकर सवाल-जवाब का दौर चला। किसी भी रेजिडेंट डॉक्टर के लिए लर्निंग का यह एक अनूठा तरीका रहा। इन जाँचों की वीडियो भी दिखाई। उन्होंने यूपी से आए नामचीन आर्थोपेडिक्स ने रेजिडेंट डॉक्टरांे से पूछा, परीक्षण से पहले आप मरीज से क्या पूछोगेे? थोड़ी-सी खामोशी के बाद डा. संदीप खुद ही बोले, मेडिकल एथिक्स कहता है, सबसे पहले मरीज की इजाजत लीजिएगा। यदि पेशेंट फीमेल है और डॉक्टर मेल है तो किसी फीमेल नर्स की उपस्थिति जरूरी है। फाइनल परीक्षा के दौरान क्या सवाल पूछे जाएंगे? उन्हांेने सवालों का खुद ही उदाहरण देते हुए कहा कि ये सवाल भी पूछे जा सकते हैं।
उत्तर प्रदेश आर्थोपेडिक्स एसोसिएशन- यूपीओए के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार ने घुटने के आसपास के सॉफ्ट टिशू जैसे कि मांस पेशियां, धागे आदि की बीमारियों की चोट के बारे में विस्तार से बताया कि यदि ऐसा कोई पेशेंट आप के पास आता है तो आप एमआरआई के जरिए आप कैसे तय करेंगे कि पेशेंट के इलाज का तरीका क्या हो? उन्होंने पीपीटी के जरिए अत्याधुनिक एमआरआई की मशीन की पिक दिखाते हुए विस्तार से बताया कि अमुक बीमारी में एमआरआई की तस्वीर कैसी होगी? साथ ही उन्होंने पीपीटी के जरिए यह भी दर्शाया आर्थोस्कोपी से न केवल घुटने के अंदरूनी हालात से वाकिफ हुआ जा सकता है बल्कि उम्दा ट्रीटमेंट कैसे हो, यह भी जाना जा सकता है। उन्होंने लगातार दूसरी बार तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज रिसर्च सेंटर की ओर से मेजबानी का श्रेय मेडिकल कॉलेज और उसके आला प्रबंधन को दिया।

यूपीएओ पीजीआईसीएल के फर्स्ट डे टीएमयू मेडिकल कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल- डा. एस के जैन, एडिशनल मेडिकल सुपरिटेडेंट एवं मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. वीके सिंह , टीबी विभाग के एचओडी डॉ. मजहर मकसूद के अलावा टीएमयू आर्थो विभाग की ओर से डॉ. प्रखर अग्रवाल, डॉ. अल्ताफ हुसैन, डॉ. वकुल महिपाल, डॉ. नरेश राणा, डॉ. अंकित नारंग, आर्थो विभाग के सभी जूनियर रेजिडेंट डाक्टर्स की उल्लेखनीय मौजूदगी रही। अंतिम सत्र में जूनियर रेजिडेंट डाक्टर्स ने वार्ड में मौजूद मरीजों को लेकर केस प्रजेंट किए। यूपी से आए जाने-माने आर्थोपेडिक्स ने रेजिडेंट डॉक्टर्स से तमाम सवाल भी पूछे। अन्त में मेहमानों को स्मृति चिह्न और सर्टिफिकेट भी दिए गए।

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