टीएमयू में चक्रवर्ती सम्राट भरत की दिग्विजय यात्रा का भव्य आयोजन, पुष्पवर्षा से खिला परिसर

मुरादाबाद, 6 नवंबर। तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय (टीएमयू) का परिसर बुधवार को भक्ति, श्रद्धा और संस्कृति के रंगों में रंगा नज़र आया। अवसर था चक्रवर्ती सम्राट भरत की दिग्विजय यात्रा का, जिसे देखने और इसमें भाग लेने के लिए हजारों श्रद्धालु जुटे। विश्वविद्यालय परिसर में सुबह से शाम तक चला यह आयोजन धार्मिक उत्सव का रूप लेता गया।

दिग्विजय यात्रा की शुरुआत बागड़पुर फ्लाईओवर के नीचे से मंडलायुक्त श्री आन्जनेय कुमार सिंह ने 12:15 बजे हरी झंडी दिखाकर की। टीएमयू के ग्रुप वाइस चेयरमैन श्री मनीष जैन ने सम्राट भरत और श्रीमती ऋचा जैन ने सुभद्रा चक्रवर्ती की भूमिका निभाई। उनके साथ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, श्रीमती वीना जैन, एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन और श्रीमती जहान्वी जैन विशाल रथ पर विराजमान थे।

आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी महाराज के शिष्य प्रज्ञाश्रमण उपाध्याय श्री 108 प्रज्ञानंद जी महामुनिराज, मुनि श्री 108 सभ्यानंद जी मुनिराज ससंघ तथा गिरनार पीठाधीश श्री 105 समर्पण सागर जी महाराज ससंघ ने अपनी उपस्थिति से यात्रा को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।
करीब एक बजे जब चक्रवर्ती सम्राट भरत का रथ परिसर में पहुँचा तो श्रद्धालुओं ने जयकारों और मंगल ध्वनियों से स्वागत किया। रथ से फल-टोकरी वितरण के माध्यम से सम्राट और रानी सुभद्रा ने प्रतीकात्मक रूप से जनता का अभिनंदन किया। इस अवसर पर श्री ऋषि जैन ने सौधर्म इन्द्र, श्रीमती निधि जैन ने शचि इन्द्राणी, प्रो. वी.के. जैन ने महामंडलेश्वर, श्री मनोज जैन ने बाहुबली और प्रो. विपिन जैन ने कुबेर की भूमिका निभाई।
यात्रा के आकर्षण का केंद्र हाथी, घोड़े, ऊँट, सोने का रथ, बग्गियां और रंग-बिरंगे परिधान रहे। पुणे के झांज पथक, केरल के चेंडा मेलम, दिल्ली के नासिक ढोल, जबलपुर के श्याम बैंड और मणिपुरी कलाकारों के अम्ब्रेला ढोल नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। इस दौरान विश्वविद्यालय परिसर में मगध, काशी, गांधार, पांचाल आदि छह राज्यों के प्रतीकात्मक स्टॉल सजाए गए, जिनमें सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।
कार्यक्रम का सबसे यादगार क्षण वह रहा जब हेलीकॉप्टर से दो घंटे तक गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा की गई, जिससे पूरा परिसर पुष्पों से आच्छादित हो उठा।
दिग्विजय यात्रा के समापन पर रिद्धि-सिद्धि भवन में अभिषेक और शांतिधारा का आयोजन हुआ। इसके बाद कुलाधिपति आवास ‘संवृद्धि’ में वात्सल्य भोज रखा गया। इस अवसर पर श्री मज्जिनेन्द्र कल्पद्रुम महामंडल विधान के अंतर्गत चल रहे विश्व शांति महायज्ञ की रूपरेखा भी साझा की गई, जिसका समापन 7 नवंबर को होगा।
