टीएमयू के छात्रों ने जाने खेती के आधुनिक तरीके

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ख़ास बातें

  • टीएमयू एग्रीकल्चर कॉलेज के पचास से अधिक छात्रों ने की विजिट
  • इस बार के मेले की थीम थी- तकनीकी ज्ञान से आत्मनिर्भर भारत
  • स्मार्ट, संरक्षित, जैविक और प्राकृतिक खेती मॉडल थे मुख्य आकर्षण

 

–प्रो. श्याम सुंदर भाटिया

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज के तृतीय वर्ष के छात्रों ने भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान- आईएआरआई में आयोजित किसान मेले का भ्रमण करके खेती के आधुनिक तरीकों को समझा। इस बार किसान मेले की थीम- तकनीकी ज्ञान से आत्मनिर्भर भारत थी। किसान मेले का उद्देश्य छात्रों और किसानों को कृषि की नवीनतम तकनीकों की जानकारी देना और मेले में आईं खेती के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी कंपनियों से खेती की बारीकियों को समझाना था। मेले में स्मार्ट खेती मॉडल, संरक्षित खेती/हीड्रोपोनिक्स/एरोपोनिक्स और वर्टीकल खेती का प्रोत्साहन, कृषि उत्पादों के निर्यात का प्रोत्साहन, स्टार्ट-अप और किसान उत्पादक संगठन को प्रेरित करना, जैविक और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना आदि मुख्य आकर्षक का केन्द्र थे। निदेशक छात्र कल्याण प्रो. एमपी सिंह ने उम्मीद जताई कि यह विजिट एग्रीकल्चर स्टुडेंट्स के लिए मूल्यवान साबित होगी।

किसान मेले में कृषि से जुड़ी विभिन्न नवीनतम तकनीकों जैसे- इंटीग्रेटेड वर्टीकल फार्मिंग, मशरूम उत्पादन के लिए विभिन्न तकनीकियों, कटाई उपरांत प्रबंधन, मिट्टी की नमी बचाए रखने आदि को विभिन्न मॉड़लों की सहायता से समझाया गया था। विद्यार्थियों ने अलग-अलग स्टाल्स पर जाकर प्रश्न पूछे, जिनके कंपनियों के प्रतिनिधियों ने जवाब दिए और स्टुडेंट्स की जिज्ञासाओं को संतुष्ट किया। छात्र-छात्राओं ने भारतीय कृषि अनुसंधान- आईएआरआई में नियुक्त प्रसार विभाग के वैज्ञानिक डॉ. गिरिजेश सिंह महरा से मेले के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की। श्री महरा ने स्टुडेंट्स को मेले की विशेषताओं को विस्तार से अवगत कराया। इस मौके पर डॉ. प्रवीण सिंह, डॉ. अरविन्द प्रताप सिंह, डॉ. आकांक्षा सिंह के साथ-साथ 50 छात्र-छात्राओं की भी मौजूदगी रही।

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