जोशीमठ कॉलेज में धूमधाम से मनाया गया जनजातीय गौरव दिवस
बिरसा मुंडा और स्थानीय जननायकों को दी श्रद्धांजलि
ज्योतिर्मठ, 15 नवंबर (कपरूवाण)।राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जोशीमठ में उत्तराखंड सरकार के निर्देशानुसार जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर भव्य टाउनहॉल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को समर्पित इस कार्यक्रम में भारतीय स्वाधीनता संग्राम, सामाजिक-राजनैतिक आंदोलनों और लोकतांत्रिक संघर्षों में देश की विभिन्न जनजातियों के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
जेपी हॉल में आयोजित समारोह की शुरुआत माता सरस्वती, भगवान बिरसा मुंडा, चिपको नेत्री गौरा देवी, कॉमरेड गोविंद सिंह रावत और केदारसिंह फोनिया सहित प्रमुख जनजातीय नायकों के चित्रों पर दीप प्रज्वलित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने से हुई।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. नंदन सिंह रावत ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती जनजातीय समाज के इतिहास और उनके संघर्षों को पुनः स्मरण करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
मुख्य अतिथि, ज्योतिर्मठ के पूर्व प्रमुख एवं पूर्व राज्य मंत्री ठाकुर सिंह राणा ने कहा कि स्वाधीनता संग्राम में देशभर की जनजातियों का अविस्मरणीय योगदान रहा है। उन्होंने नीति-माणा घाटी की भोटिया जनजाति के सामाजिक-सांस्कृतिक योगदान और वहां के प्रमुख नायकों की विरासत पर भी प्रकाश डाला।
अतिविशिष्ट अतिथि ब्लॉक प्रमुख अनूप सिंह नेगी ने भारतीय ज्ञान परंपरा में आदिवासी समुदायों की भूमिका को युवाओं के सामने लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सामाजिक कार्यकर्ता अतुल सती ने जनजातीय संघर्ष की धरोहर पर विचार साझा किए, जबकि सामाजिक कार्यकर्ता पुष्कर सिंह राणा और नंदी राणा ने नीति-माणा घाटी और चिपको आंदोलन की गौरवशाली परंपरा का स्मरण कराया।
विशेष व्याख्यान में साहित्यकार डॉ. चरण सिंह केदारखंडी, समाज विज्ञानी डॉ. राजेंद्र सिंह एवं इतिहासकार डॉ. रणजीत सिंह मर्तोलिया ने कहा कि जनजातीय समुदाय जल, जंगल और जमीन से गहरे जुड़े होते हैं। बिरसा मुंडा से लेकर गुजरात, नागालैंड, कश्मीर-हिमाचल, बिहार-झारखंड और दक्षिण भारत तक सभी जनजातियों का सबसे बड़ा संदेश यही है कि मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलित संबंध ही मानवता का आधार है।
कार्यक्रम में गौरा देवी के पौत्र सोहन सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश साह, पार्षद ललिता देवी, पीटीए अध्यक्ष कलम सिंह राणा, पैनखंडा जनजाति उत्थान समिति के धर्मेंद्र पंवार, उप कोषाधिकारी राजेश कुमार एवं पूर्णिमा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
युवाओं ने जनजातीय गौरव थीम पर आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करती हुई कॉलेज की प्राचार्य प्रो. प्रीति कुमारी—जो बिरसा मुंडा की भूमि से आती हैं—ने कहा कि भारत की जनजातियों के इतिहास और उनके योगदान का पुनर्पाठ ही नए भारत के निर्माण में सहायक होगा।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण था ‘गौरा वाटिका’ का शुभारंभ, जिसे गौरा देवी पर्यावरण एवं विकास समिति, रैणी द्वारा चिपको नेत्री की स्मृति में शुरू किया गया। इसमें फलदार पौधों की एक विशेष वाटिका विकसित की जाएगी।
डॉ. नवीन पंत के संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के डॉ. धीरेंद्र सिंह, महाविद्यालय के सभी शिक्षक-कर्मचारी तथा छात्रसंघ अध्यक्ष दिव्याशु, सचिव सृष्टि सहित सभी पदाधिकारी उपस्थित रहे।
