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ट्रंप की व्यापारिक उथल-पुथल से अमेरिका-भारत समझौते पर भी उठने लगे सवाल

 

कनाडा पर टैरिफ लगाने के लिए राष्ट्रपति की आपात शक्तियों को प्रतिनिधि सभा ने खारिज किया

-चिदानंद राजघट्टा –
वाशिंगटन: कनाडा पर लगाए गए टैरिफ को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कांग्रेस की दुर्लभ फटकार, अमेरिका-कनाडा के एक प्रमुख पुल को निशाना बनाती राष्ट्रपति की तीखी बयानबाज़ी और आपातकालीन व्यापार शक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट में लंबित फैसला—ये सभी घटनाएँ मिलकर अमेरिकी व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता को और गहरा कर रही हैं। इसका असर नवगठित अमेरिका-भारत व्यापार ढांचे की स्थायित्व पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
बुधवार को रिपब्लिकन-नियंत्रित प्रतिनिधि सभा ने 219-211 के मत से राष्ट्रपति द्वारा “राष्ट्रीय आपातकाल” का हवाला देकर कनाडाई वस्तुओं पर दंडात्मक टैरिफ लगाने की शक्ति समाप्त करने के पक्ष में मतदान किया। छह रिपब्लिकन सांसदों ने लगभग सभी डेमोक्रेट्स के साथ इस प्रस्ताव का समर्थन किया। यह असाधारण कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत बेहद मामूली (218-214) है। इससे पहले सीनेट भी दो बार कनाडा पर टैरिफ रोकने के पक्ष में मतदान कर चुकी है।
हालांकि यह प्रस्ताव प्रतीकात्मक माना जा रहा है। कार्यकारी शक्तियों से लैस राष्ट्रपति ट्रंप के पीछे हटने की संभावना कम है, लेकिन इसका राजनीतिक संदेश अहम है। सांसद राष्ट्रपति द्वारा अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियाँ अधिनियम के तहत व्यापार युद्ध छेड़ने के तरीके को लेकर असहज दिखाई दे रहे हैं—जबकि परंपरागत रूप से व्यापार नीति कांग्रेस के अधीन रही है। कैपिटल हिल के कुछ नेताओं का निजी तौर पर कहना है कि यह मतदान सुप्रीम कोर्ट के लिए भी एक संकेत है, जो इन टैरिफों की वैधता की समीक्षा कर रहा है—कि कांग्रेस कार्यकारी अधिकार की इस व्याख्या से सहमत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष नवंबर में इस मामले की सुनवाई की थी और जल्द फैसला आने की संभावना है—संभव है कि 20 फरवरी की अगली गैर-मौखिक सत्र में ही निर्णय आ जाए। न्यायाधीशों ने वैचारिक मतभेदों से परे इस पर संदेह जताया है कि फेंटेनाइल की तस्करी और व्यापार असंतुलन—जैसे भारत के साथ अमेरिका का घाटा—क्या “राष्ट्रीय आपातकाल” की श्रेणी में आते हैं, जिनके आधार पर एकतरफा टैरिफ लगाए जा सकें। यदि कोर्ट इन उपायों को रद्द करता है, तो 2025 से अब तक आयात शुल्क चुका चुके आयातकों को सरकार को 150 से 200 अरब डॉलर तक की वापसी करनी पड़ सकती है, जो वित्तीय और राजनीतिक दोनों ही दृष्टियों से बड़ा झटका होगा।
यह कानूनी लड़ाई कनाडा के साथ नए तनाव के बीच सामने आई है। सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने डेट्रॉयट (अमेरिका) और विंडसर (कनाडा) को जोड़ने वाले 4.6 अरब डॉलर की लागत वाले गॉर्डी हाउ अंतरराष्ट्रीय पुल के उद्घाटन को रोकने की धमकी दी। उन्होंने कनाडा पर अमेरिका का शोषण करने का आरोप लगाते हुए पुल परियोजना में 50 प्रतिशत स्वामित्व की मांग की। ट्रंप का दावा था कि कनाडा द्वारा वित्तपोषित इस परियोजना ने “बाय अमेरिकन” नियमों का उल्लंघन किया है, जबकि कनाडाई अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इसमें अमेरिकी और कनाडाई—दोनों देशों के स्टील और श्रम का इस्तेमाल हुआ है।

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