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191 साल पुराना रडुवा प्राइमरी स्कूल बंदी की कगार पर; एक छात्र के लिए 3 शिक्षिकाएं

 

पोखरी, 24 फरवरी (राणा)। विकासखंड पोखरी का ऐतिहासिक राजकीय प्राथमिक विद्यालय रडुवा इन दिनों प्रधानाध्यापिका और ग्रामीणों के बीच चले आ रहे विवाद के कारण चर्चा में है। वर्ष 1835 में अंग्रेजी शासनकाल में स्थापित यह विद्यालय कभी क्षेत्र में शिक्षा का प्रमुख केंद्र हुआ करता था, लेकिन वर्तमान में छात्र संख्या घटकर मात्र एक रह जाने से विद्यालय बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। विडंबना यह है कि विद्यालय में प्रधानाध्यापिका सहित दो शिक्षिकाएं तैनात हैं।
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान मनीषा देवी और क्षेत्र पंचायत सदस्य चन्द्रकला देवी के नेतृत्व में प्रधानाध्यापिका के तत्काल स्थानांतरण की मांग की है। उनका आरोप है कि विद्यालय में लंबे समय से अव्यवस्थाएं व्याप्त हैं तथा प्रधानाध्यापिका के कार्यकाल में हुए निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए।
ग्रामीणों के अनुसार, यह विद्यालय कभी हापला घाटी, त्रिशूला घाटी और खदेड़ पट्टी के काणडेई, चंद्रशिला, रडुवा, डुगर, बगथल, तोणजी, सलना, डांडा, किमोठा, भिकोना सहित दर्जनों ग्राम पंचायतों के छात्रों के लिए शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। संयुक्त उत्तर प्रदेश के दौर में पर्वतीय विकास मंत्री रहे स्व. नरेंद्र सिंह भंडारी, संयुक्त गढ़वाल के जिला पंचायत अध्यक्ष स्व. श्रीधर आजाद, डॉ. पातीराम परमार और स्व. नरेंद्र किमोठी जैसी कई प्रमुख हस्तियों ने इसी विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी।
ग्रामीणों ने 10 फरवरी को अटल उत्कृष्ट विद्यालय राजकीय इंटर कॉलेज रडुवा में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित जनता दरबार में तथा 13 फरवरी को उप शिक्षा अधिकारी नेहा भट्ट को ज्ञापन सौंपकर प्रधानाध्यापिका के स्थानांतरण और निर्माण कार्यों की जांच की मांग की थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उप शिक्षा अधिकारी नेहा भट्ट ने अटल उत्कृष्ट विद्यालय राजकीय इंटर कॉलेज नागनाथ के प्रधानाचार्य जी.एल. सैलानी को जांच अधिकारी नामित किया। उनके नेतृत्व में गठित जांच टीम में राजेंद्र सिंह कोहली (मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, उप शिक्षा अधिकारी कार्यालय पोखरी), विजयादशमी रावत (प्रधानाचार्य, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज पोखरी), विक्रम भंडारी (हेडमास्टर, जूनियर हाईस्कूल पोखरी) तथा कु. निधि (बीआरसी पोखरी) शामिल रहीं। टीम ने विद्यालय पहुंचकर प्रधानाध्यापिका और बड़ी संख्या में उपस्थित ग्रामीणों के बयान दर्ज किए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर प्रधानाध्यापिका का स्थानांतरण नहीं किया गया तो वे अपने बच्चों को विद्यालय नहीं भेजेंगे और आवश्यकता पड़ने पर चक्का जाम व आंदोलन भी किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानाध्यापिका के स्थानांतरण के बाद विद्यालय में छात्र संख्या बढ़ेगी।
जांच अधिकारी जी.एल. सैलानी ने बताया कि ग्रामीणों में प्रधानाध्यापिका को लेकर काफी आक्रोश है। जांच रिपोर्ट खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय को सौंपी जाएगी, जिसके बाद जिला स्तर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
उधर, उप शिक्षा अधिकारी नेहा भट्ट ने कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उसे जिला शिक्षा अधिकारी को अग्रसारित किया जाएगा, जहां से अंतिम निर्णय होगा।
वहीं, प्रधानाध्यापिका पवित्रा टम्टा ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह उनके विरुद्ध रची गई साजिश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी स्तर की जांच के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान मनीषा देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य चन्द्रकला देवी, पूर्व प्रधान रजना देवी, मोहन सिंह बर्तवाल, दशरथ बर्तवाल, तेजराम भट्ट, अमरदेव भट्ट, दिनेश रडवाल, महिला मंगल दल अध्यक्ष बिनीता देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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