रुद्रप्रयाग में छेनागाड़ आपदा: दो और शव बरामद, कुल सात की मौत की पुष्टि
देहरादून, 26 अक्टूबर। रुद्रप्रयाग जिले के छेनागाड़ क्षेत्र में 28-29 अगस्त 2025 को बादल फटने से आई भीषण आपदा के लगभग दो माह बाद भी बचाव कार्य जारी है। मलबे से पांच शव और एक मानव अंग का अवशेष बरामद होने के बाद शनिवार को दो और शव मिलने की पुष्टि हुई है। इस आपदा में अब तक कुल सात शव बरामद हो चुके हैं, जबकि दो लोग अभी भी लापता हैं।
उल्लेखनीय है कि पिछले अगस्त में ऊखीमठ तहसील के छेनागाड़ में बादल फटने से मंदाकिनी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया था, जिसके चलते भूस्खलन और बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। इस घटना में नौ मजदूर लापता हो गए थे, जिनमें चार नेपाल मूल के और पांच स्थानीय मजदूर शामिल थे। ये मजदूर लोक निर्माण विभाग (PWD) के सड़क निर्माण कार्य में लगे थे। आपदा के कारण कई घर और निर्माण स्थल मलबे में दब गए थे।
बचाव कार्य और शव बरामदगी
शनिवार को बचाव दल ने एक क्षतिग्रस्त मकान से पांच शव और एक पैर का अवशेष बरामद किया। रविवार सुबह तक दो और शव मिलने की खबर है। जिला प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें मलबा हटाने में जुटी हैं, लेकिन शवों की बुरी तरह क्षत-विक्षत स्थिति के कारण पहचान में मुश्किल हो रही है। अब तक केवल एक शव की पहचान हो पाई है, जिसका नाम गोपनीय रखा गया है। बरामद शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है, और नेपाल मूल के मजदूरों के परिजनों को सूचित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
जिला मजिस्ट्रेट (DM) रुद्रप्रयाग ने बताया कि बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। सेंसर और डॉग स्क्वायड की मदद से मलबे में खोजबीन जारी है, लेकिन पहाड़ी इलाके में पहुंच और भारी बोल्डर चुनौती बने हुए हैं।
राहत और मुआवजा
प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के लिए 5 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति की समीक्षा की और अतिरिक्त राहत फंड जारी करने के निर्देश दिए। नेपाल सरकार से भी लापता मजदूरों के परिजनों की जानकारी लेने के लिए संपर्क किया जा रहा है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
आपदा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सड़क निर्माण के दौरान मलबा नदियों में डालने की प्रथा ऐसी घटनाओं को बढ़ावा दे रही है। विशेषज्ञों ने निर्माण कार्यों में पर्यावरणीय दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी है।
परिवारों का दर्द
लापता मजदूरों के परिजनों का दुख गहरा गया है। एक परिजन ने बताया, “दो महीने तक हमें उम्मीद थी, लेकिन अब केवल शोक बाकी है।” प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को मनोवैज्ञानिक सहायता देने की भी व्यवस्था शुरू की है।
बचाव दल दो लापता लोगों की तलाश में जुटी है, और उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति स्पष्ट होगी। यह आपदा उत्तराखंड में बार-बार होने वाली प्राकृतिक त्रासदियों की गंभीरता को रेखांकित करपुष्टि
