खेल/मनोरंजन

यूनिसेफ और आईएफएफआई : पांच फिल्में, एक सार्वभौमिक कहानी

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के साथ मिलकर बचपन की विविध भावनाओं – उसकी जिज्ञासा, संघर्ष और अटूट दृढ़ता – का उत्सव मना रहा है।  ऐसी कहानियों के माध्यम से जो हमें झंझोरती है, प्रेरित करती है और सोचने को मजबूर करती है!  

यूनिसेफ और आईएफएफआई के बीच सहयोग की शुरूआत 2022 में हुई थी। अब अपने चौथे वर्ष में बच्चों के अधिकारों और फिल्म जगत के दो प्रसिद्ध ब्रांडों का ये संगम एक ऐसा मंच बना रहा है,  जहां सिनेमा और संवेदना का मिलन होता है। आईएफएफआई के 56 वें ​​संस्करण में ऐसी फ़िल्में एक साथ लाई गई हैं जो विभिन्न संस्कृतियों में बच्चों के सामने आने वाली वास्तविकताओं को सामने लाती है और उनके साहस, रचनात्मकता और आशा का उत्सव मनाती हैं। यूनिसेफ की मानवीय दृष्टि और सिनेमा की अभिव्यक्ति शक्ति को जोड़कर यह साझेदारी इस विश्वास को पुन: स्थापित करती है कि सिनेमा में सहानुभूति जगाने और हर बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए कार्रवाई को प्रेरित करने की क्षमता है।

पांच फ़िल्मेंएक सार्वभौमिक कहानी

इस वर्ष चयनित पांच उत्कृष्ट फिल्मों में कोसोवोदक्षिण कोरियामिस्र और भारत की कहानियां शामिल हैं – जो बचपन की विभिन्न सच्चाईयों को उजागर करती है : अपनापन खोजने की चाह, गरिमा के लिए संघर्ष, प्यार की आवश्यकता और स्वतंत्रता का सपना। ये फिल्में मिलकर एक भावनात्मक और सिनेमाई ताना-बाना रचती है, जो यूनिसेफ और आईएफएफआई की साझा भावना को व्यक्त करती है – कहानियों के कहने की शक्ति पर विश्वास, जो दिलों को खोलती है और दुनिया को अधिक न्यायपूर्ण तथा संवेदनशील बनाने का मार्ग दिखाती हैं।

1. जन्मदिन मुबारक हो (मिस्र/ मिस्र की अरबी भाषा)

मिस्र की फ़िल्म निर्माता सारा गोहर की मार्मिक पहली फ़िल्म ” हैप्पी बर्थडे” का प्रीमियर ट्रिबेका फ़िल्म फेस्टिवल 2025 में हुआ और यह मिस्र की ओर से ऑस्कर के लिए आधिकारिक प्रविष्टि भी है। यह आठ साल की नौकरानी तोहा की कहानी है, जो अपनी सबसे अच्छी दोस्त नेली के लिए एक शानदार जन्मदिन की पार्टी देने पर अड़ी है, भले ही उसके आसपास की दुनिया न्यायपूर्ण न हो। आधुनिक काहिरा की पृष्ठभूमि पर आधारित यह फ़िल्म विशेषाधिकार और मासूमियत के बीच की गहरी खाई को उजागर करती है और दिखाती है कि कई बार बच्चे मानवता को वयस्कों से अधिक स्पष्टता से समझते हैं।

मित्रता और असमानता के अपने कोमल चित्रण के माध्यम से हैप्पी बर्थडे प्रत्येक बच्चे के लिए गरिमा, समानता और अवसर के प्रति यूनिसेफ की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, चाहे वे कहीं भी पैदा हुए हों।

2. कदल कन्नी (भारत/तमिल भाषा)

तमिल फिल्म निर्माता दिनेश सेल्वराज की गीतात्मक फ़िल्म “कदल कन्नी” एक ऐसी दुनिया को चित्रित करती है जहां अनाथ बच्चे फ़रिश्तों और जलपरियों के सपने देखते हैं, जो देखभाल, आराम और अपनेपन के प्रतीक हैं। यथार्थवाद और कल्पना के संगम के माध्‍यम से यह फ़िल्म उस कल्पनाशक्ति का जश्न मनाती है जो बच्चों को कठिनाई में भी संबल प्रदान करती है और हमें याद दिलाती है कि सपने अक्सर उनके अस्तित्व का पहला रूप होते हैं। अपनी कविता और करुणा के साथ “कदल कन्नी” यूनिसेफ और आईएफएफआई शोकेस को खूबसूरती से पूरा करती है, जो हर बच्चे के सपने देखने, देखे जाने और प्यार किए जाने के अधिकार का जश्न मनाती है।

3. पुतुल (भारत/हिन्दी भाषा)

भारतीय फिल्म निर्माता राधेश्याम पिपलवा की “पुटुल” एक सात साल की बच्ची की कहानी है, जो अपने माता-पिता के तलाक के भावनात्मक तूफान में फंसी हुई है। आहत और उलझन में, वह अपने दोस्तों, “डैमेज्ड गैंग” नामक एक समूह और अपने प्यारे नाना में सांत्वना पाती है। जब वह गायब हो जाती है, तो उसके माता-पिता न केवल अपने डर का, बल्कि अपने दिलों के टूटने का भी सामना करने को मजबूर हो जाते हैं। मार्मिक और बेहद मानवीय, “पुटुल ” टूटे हुए परिवारों में बच्चों के मौन मजबूती की पड़ताल करती है। यह मानसिक स्वास्थ्य और हर बच्चे के प्यार, समझ और सुरक्षा में बड़े होने के अधिकार के लिए यूनिसेफ की वकालत को प्रतिध्वनित करती है।

हद मानवीय, “पुटुल ” टूटे हुए परिवारों में बच्चों के मौन लचीलेपन की पड़ताल करती है। यह मानसिक स्वास्थ्य और हर बच्चे के प्यार, समझ और सुरक्षा में बढ़ने के अधिकार के लिए यूनिसेफ की वकालत को प्रतिध्वनित करती है।

4. द बीटल प्रोजेक्ट (कोरिया/कोरियाई भाषा)

कोरियाई फिल्म निर्माता जिन क्वांग-क्यो की दिल को छू लेने वाली फिल्म “द बीटल प्रोजेक्ट” का शिकागो के एशियन पॉप अप में प्रीमियर हुआ। फिल्म की शुरुआत उत्तर कोरिया से आए एक बीटल से भरे प्लास्टिक बैग से होती है जो एक दक्षिण कोरियाई लड़की के हाथों में पहुंच जाता है। यह बीटल कोरियाई सीमा के दोनों ओर रहने वाले बच्चों के बीच जिज्ञासा और जुड़ाव जगाता है। यह विभाजन से परे साझा आश्चर्य का प्रतीक बन जाता है। गर्मजोशी और हास्य के साथ कही गई यह फिल्म जिज्ञासा, सहानुभूति और उस मासूम आशा का जश्न मनाती है। यह दर्शाता है कि सरल सी विस्मय भावना भी सीमाओं को पार कर दिलों को जोड़ सकती है।  अपनी मेल-मिलाप और करुणा की भावना के साथ “द बीटल प्रोजेक्ट” शांति और समझ को प्रेरित करने के लिए युवाओं की कल्पनाशीलता और सहानुभूति में यूनिसेफ के विश्वास का प्रतीक है।

5 . द ओडिसी ऑफ जॉय (ओडिसेजा ई गज़िमिट) (फ्रांस, कोसोवो/अल्बानियाई, अंग्रेजी, फ्रेंच, रोमानी भाषाएं)

कोसोवो के फिल्म निर्माता ज़गजिम तेरज़ीकी की बेहद प्रभावशाली पहली फीचर फिल्म “ओडिसी ऑफ जॉय” का प्रीमियर काहिरा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, 2025 में हुआ। कहानी नई सहस्राब्दी की शुरुआत में शुरू होती है, जहां 11 वर्षीय लिस, जिसका पिता युद्ध में लापता हो जाता है, खुद को दुःख और बड़े होने के बीच फंसा हुआ पाता है। जब वह स्थानीय बच्चों का मनोरंजन करने के लिए युद्धोत्तर कोसोवो में यात्रा कर रहे एक फ्रांसीसी जोकर मंडली में शामिल होता है, तो लिस उपचार की दिशा में एक शांत यात्रा शुरू करता है, यह खोज करता है कि आशा, एक बार खो जाने के बाद भी, फिर से प्राप्त की जा सकती है। कोमल किन्तु गहन, “ओडिसी ऑफ जॉय” संघर्ष के बीच बचपन को परिभाषित करने वाली मजबूती की भावना को दर्शाती है, जो हर बच्चे की खुशी, सुरक्षा और भविष्य के अधिकार में यूनिसेफ के स्थायी विश्वास को प्रतिध्वनित करती है।

ये पांचों फिल्में मिलकर यूनिसेफ और आईएफएफआई के सहयोग की सार्थकता को दर्शाती हैं, जो दुनिया भर के बच्चों की आशाओं, भय और सफलताओं को आवाज देने के लिए सिनेमा की परिवर्तनकारी शक्ति का उपयोग करती है।

दुनिया भर के बच्चों के जीवन को दर्शाती इन प्रभावशाली फिल्मों को देखने का मौका न चूकें।। यूनिसेफ और आईएफएफआई फिल्मों की स्क्रिनिंग समय-सारणी देखने के लिए यहां क्लिक करें।

आईएफएफआई के बारे में:

1952 में स्थापित भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित सिनेमा उत्सव है। राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार और एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ गोवा (ईएसजी), गोवा सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह महोत्सव एक वैश्विक सिनेमाई पॉवरहाउस के रूप में विकसित हुआ है—जहां पुनर्स्थापित क्लासिक फिल्मों से लेकर नए प्रयोग, महान दिग्गजों से लेकर नए निर्भीक फर्स्ट टाइमर्स तक, सभी एक साथ आते हैं। आईएफएफआई को वास्तव में जो चीजें शानदार बनाती हैं, वे हैं –  अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक प्रदर्शन, मास्टरक्लास, श्रद्धांजलि और ऊर्जावान वेव्स फिल्म बाजार, जहां विचार, सौदे और सहयोग उड़ान भरते हैं। गोवा की शानदार तटीय पृष्ठभूमि में 20 से 28 नवंबर तक आयोजित होने वाला आईएफएफआई का 56वां संस्करण भाषाओं, शैलियों, नवाचारों और नई आवाज़ों के एक जगमगाते स्पेक्ट्रम का वादा करता है—विश्व मंच पर भारत की रचनात्‍मक प्रतिभा का एक भव्य उत्सव।

 

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