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दिमागी आघात के इलाज के लिए अनूठी जैविक क्लॉट बुस्टर विकसित

 

An ischemic stroke occurs when a blood clot, known as a thrombus, blocks or plugs an artery leading to the brain. A blood clot often forms in arteries damaged by a buildup of plaques, known as atherosclerosis. It can occur in the carotid artery of the neck as well as other arteries.

 

 

-By Usha Rawat

सीएसआईआर  एवं माइक्रोबायल टेक्नोलॉजी ( सीएसआईआर – आईएमटेक) में अन्वेषणकर्ताओं की टीम द्वारा विकसित एक नए क्लॉट बुस्टर, पीईजीवाईलेटेड स्ट्रप्टोकिनसे-एक अनूठी जैविक इकाई से इस्केमिक स्ट्रोक के उपचार में क्रांति आना तय है। इस्केमिक स्ट्रोक एक ऐसी अवस्था होती है जो मस्तिष्क धमनियों में होने वाले इम्बोली, थ्रोबस या एथरोस्कलेरोसिस के कारण उत्पन्न होती है। भारत में स्ट्रोक की घटना पश्चिमी देशों की तुलना में अधिक होती है और सभी स्ट्रोकों में इस्केमिक स्ट्रोक का प्रतिशत लगभग 87 प्रतिशत है।

जब मस्तिष्क में रक्त ले जाने वाली धमनी बंद हो जाती है, तो एक इस्केमिक स्ट्रोक हो सकता है। एथेरोस्क्लेरोसिस के कारण हो सकता है धमनियों में वसा जमा (अर्थ्रोमा या प्लाक) हो जाए। गर्दन में धमनियां, खास तौर पर धमनियों में आंतरिक गांठ अर्थ्रोमा का एक आम स्थान हैं। इस्कीमिक स्ट्रोक मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी को रक्तापूर्ति देने वाली किसी रक्त वाहिका में किसी अवरोध (थक्के या एम्बोलाइ) के कारण होते हैं। यह अवरोध आमतौर पर ऐसे प्लाक (टुकड़े) के कारण उत्पन्न होता है जो रक्त वाहिकाओं में जमा हुआ होता है और फिर वह टूट कर अलग हो जाता है और बहते हुए CNS में आ जाता है।

 

यदि आप इस्केमिक स्ट्रोक के पहले लक्षणों के 3 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचते हैं, तो आपको रक्त के थक्कों को तोड़ने के लिए थ्रोम्बोलाइटिक (“थक्का-बंद करने वाली” दवा) नामक एक प्रकार की दवा मिल सकती है। टिश्यू प्लास्मिनोजेन एक्टिवेटर (टीपीए) एक थ्रोम्बोलाइटिक है। टीपीए स्ट्रोक से उबरने की संभावना में सुधार करता है।

 

सीएसआईआर – आईएमटेक एवं मुंबई की एपाइजेन बायोटेक प्रा. लि. ने इस्केमिक स्ट्रोक के उपचार के लिए पीईजीवाईलेटेड स्ट्रप्टोकिनसे का विकास करनेे के लिए समझौता किया है। एपाइजेन इस्केमिक स्ट्रोक के लिए इस अनूठी जैविक इकाई (एनबीई) थ्रोबोलिटिक प्रोटीन के विशिष्ट लाइसेंस के साथ भारत में पहली कंपनी है।

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