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त्तराखण्ड में पानी के संरक्षण की अनूठी पहल शुरू, गैरसैंण से भूजल पुनर्भरण का आगाज

 

पहले चरण में गैरसैंण व चौखुटिया के 20 हैंडपंप पुनर्जीवित किए जाएंगे

-हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट –
भराड़ीसैंण 19 अगस्त। उत्तराखण्ड राज्य में जल संकट से निपटने के लिए मंगलवार को एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत हुई। विधान भवन भराड़ीसैंण में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी भूषण ने स्वामी राम विश्वविद्यालय, जौलीग्रांट के सहयोग से “डायरेक्ट इंजेक्शन जल स्रोत पुनर्भरण योजना” का शुभारंभ किया। इस अवसर पर “वाइब्रेंट बर्ड ऑफ कोटद्वार” नामक फोटो संग्रह का भी विमोचन किया गया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार तकनीकी नवाचारों को अपनाकर जल संकट से निपटने के प्रयास कर रही है। वहीं, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी भूषण ने कहा कि जल संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड के भविष्य की जीवनरेखा है। उन्होंने कहा कि भूजल पुनर्भरण भविष्य की जल सुरक्षा का आधार बनेगा और यह योजना सतत जल प्रबंधन तथा जल संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

इस दौरान जानकारी दी गई कि इस परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 8 जुलाई 2025 को अंतर्राष्ट्रीय संसदीय अध्ययन, शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, भराड़ीसैंण और स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके तहत उपचारित वर्षा जल को निष्क्रिय हैंडपंपों में इंजेक्ट कर भूजल स्तर बढ़ाया जाएगा। इस तकनीक को विश्वविद्यालय, जौलीग्रांट के विशेषज्ञों ने विकसित किया है। योजना के पहले चरण में ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण और चौखुटिया विकासखंड के 20 चयनित हैंडपंपों को पुनर्भरण कर पुनः क्रियाशील बनाया जाएगा। यह प्रयास उत्तराखण्ड में जल प्रबंधन के लिए एक स्थायी समाधान की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

विश्वविद्यालय की तकनीकी टीम के प्रोफेसर एच.पी. उनियाल, नितेश कौशिक, सुजीत थपलियाल, राजकुमार वर्मा, अतुल उनियाल, अभिषेक उनियाल और शक्ति भट्ट ने योजना की तकनीकी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। बताया गया कि किस तरह वर्षा जल को फिल्टर और ट्रीट कर सीधे भूजल भंडार तक पहुंचाया जा सकता है, जिससे सूखे हैंडपंप पुनः जीवंत हो जाएंगे। इस मौके पर विश्वविद्यालय द्वारा एक डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई।

कार्यक्रम के दौरान वन मंत्री सुबोध उनियाल, कृषि मंत्री  सहित कई विधायक, विभिन्न विभागों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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